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हिमाचल में अब हर 40 की बजाय हर पांच साल में होगा जमीन का बंदोबस्त

➤ राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई अहम बैठक

➤ जमीन की पैमाइश और डिजिटल रिकॉर्ड के लिए आधुनिक उपकरणों का होगा इस्तेमाल


हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूमि अभिलेख और राजस्व प्रणाली में एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब जमीन के बंदोबस्त की प्रक्रिया को बेहद आसान और तेज किया जा रहा है। प्रदेश में अभी तक चली आ रही पुरानी व्यवस्था के अनुसार हर 40 साल में एक बार बंदोबस्त करने का प्रावधान था, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर इसे हर पांच साल में करने की योजना बनाई गई है। इससे जमीन की सीमाएं तय करने और रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने में आसानी होगी। इस संबंध में सचिवालय में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें भूमि अभिलेख निदेशक, बंदोबस्त अधिकारी और राजस्व विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान निदेशक भूमि अभिलेख को एक विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कमेटी में उन सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा जिन्होंने पहले बंदोबस्त का कार्य किया है। आगामी 10 दिनों के भीतर इस कमेटी को अधिसूचित कर दिया जाएगा, जो एक महीने के भीतर मौजूदा व्यवस्था का गहन अध्ययन करके नियमों में जरूरी बदलाव के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव देगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य बंदोबस्त प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है ताकि लोगों को तहसीलों और पटवारघरों के चक्कर न काटने पड़ें।

गौरतलब है कि पुराने नियमों और कर्मचारियों की कमी के कारण राज्य के कई जिलों में दशकों से बंदोबस्त नहीं हो पाया है। उदाहरण के लिए, चंबा में 1951, मंडी में 1959 और कांगड़ा जिले में 1970 के बाद से बंदोबस्त की प्रक्रिया नहीं हो सकी है। अब नई व्यवस्था में रोवर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, डीजीपीएस, आरटीएस डीपीएस, ड्रोन, लीडर स्कैनर, इलेक्ट्रॉनिक डेटा कलेक्टर और लेजर डिस्टेंस मीटर जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके जमीन की सीमाएं तय करने का प्रस्ताव है। इससे नक्शों और जमीन की सीमाओं का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।