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इस सेब सीजन में अब तक 13,202 मीट्रिक टन सेब की खरीदः जगत सिंह नेगी

➤ हिमाचल में एमआईएस के तहत अब तक 13,202.666 मीट्रिक टन सेब खरीदा, मंडियों में पहुंचीं 1.23 करोड़ से अधिक पेटियां

➤ सरकार का दावा- पिछली भाजपा सरकार की 114 करोड़ रुपये की देनदारी चुकाने के साथ बागवानों को 262 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

➤ एमआईएस में पारदर्शिता के लिए ऐप से पंजीकरण और डीबीटी से भुगतान, एक रुपये प्रति किलो बढ़ोतरी की भी घोषणा


शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के दौरान मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत अब तक 13,202.666 मीट्रिक टन सेब की खरीद की जा चुकी है। यह खरीद हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) और हिमफेड के माध्यम से की गई है। राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने इस वर्ष सेब की फसल कम होने के पीछे बेमौसमी बारिश, समय पर बारिश न होना, फूल आने के दौरान ठंड पड़ना और पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स से जुड़ी परिस्थितियों सहित कई कारण बताए।

बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सेब उत्पादन पर मौसम की परिस्थितियों का असर पड़ा है। सेब की अच्छी फसल के लिए सर्दियों में आवश्यक ठंड, फूल आने के समय अनुकूल तापमान और सही समय पर बारिश महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन परिस्थितियों में बदलाव आने से बागवानों को उत्पादन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस वर्ष फसल में कितनी कमी आई है, इसका विस्तृत आंकड़ा प्रेस वार्ता में नहीं बताया गया।

मंडियों में पहुंचीं 1.23 करोड़ से अधिक सेब पेटियां

जगत सिंह नेगी ने बताया कि अब तक प्रदेश की मंडियों में 1 करोड़ 23 लाख 34 हजार 739 सेब पेटियां पहुंच चुकी हैं। वहीं, एमआईएस के तहत एचपीएमसी और हिमफेड की ओर से 13,202.666 मीट्रिक टन सेब की खरीद की गई है।

मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब खरीद का उद्देश्य निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से बागवानों को उनकी उपज के विपणन में सहायता उपलब्ध कराना है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस योजना को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि बागवानों की आय का बड़ा हिस्सा सेब की फसल पर निर्भर रहता है। ऐसे में खरीद, भुगतान और पंजीकरण की प्रक्रिया का समय पर पूरा होना उनके लिए अहम है।

पिछली सरकार की 114 करोड़ रुपये की देनदारी का मुद्दा उठाया

बागवानी मंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर किसानों और बागवानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार को पिछली भाजपा सरकार से एमआईएस की 114 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली थी।

नेगी के अनुसार, वर्तमान सरकार ने इस पुरानी देनदारी का भुगतान करने के साथ अब तक किसानों और बागवानों को 262 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया है। उन्होंने इसे बागवानों के हित में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा बताया।

इस मुद्दे पर मंत्री ने पिछली और वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात रखी। हालांकि, प्रेस वार्ता में बताए गए भुगतान के आंकड़ों का विस्तृत मदवार ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

एमआईएस में पारदर्शिता के लिए बदली गई पुरानी व्यवस्था

जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के तहत मंडी मध्यस्थता योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब किसानों और बागवानों का पंजीकरण ऐप के माध्यम से किया जा रहा है।

मंत्री के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंजीकृत किसानों-बागवानों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने इसका संबंध पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और लाभार्थियों की पहचान से जोड़ा। सरकार का कहना है कि डिजिटल पंजीकरण से पात्र लाभार्थियों का विवरण व्यवस्थित करने और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिल रही है।

सेब खरीद और भुगतान से जुड़ी योजनाओं में लाभार्थियों का सही सत्यापन महत्वपूर्ण होता है, ताकि सहायता वास्तविक पात्र किसानों और बागवानों तक पहुंच सके। हालांकि, पंजीकरण की संख्या में कमी का पूरा विवरण सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसमें कितने वास्तविक लाभार्थी कम हुए और इसका कारण क्या रहा।

छोटे बागवानों को डीबीटी से भुगतान

बागवानी मंत्री ने भुगतान की जानकारी देते हुए बताया कि एमआईएस के तहत 30 बैग से कम वाले 11,285 किसानों-बागवानों और 100 बैग से कम वाले 2,827 किसानों-बागवानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया गया है।

इसके अलावा, 100 बैग से अधिक वाले करीब 7,000 किसानों-बागवानों की पहचान की गई है। इनमें से 2,000 मामलों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। शेष 5,000 मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए भूमि रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।

भूमि रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन का उद्देश्य लाभार्थियों के विवरण की जांच करना है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद संबंधित मामलों में पात्रता और भुगतान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन मामलों का सत्यापन जारी है।

एमआईएस में एक रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा

जगत सिंह नेगी ने बताया कि मंडी मध्यस्थता योजना के तहत एक रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। उनके अनुसार, इस फैसले से हजारों किसान और बागवान लाभान्वित होंगे।

सेब उत्पादकों के लिए खरीद दर में बढ़ोतरी का सीधा संबंध उनकी उपज से मिलने वाली राशि से हो सकता है। ऐसे में बागवानों की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई दर किस श्रेणी पर और किस प्रकार लागू होती है तथा इससे उन्हें कुल कितना लाभ मिलेगा।

कुल मिलाकर, इस सेब सीजन में सरकार की ओर से खरीद, भुगतान और पंजीकरण की व्यवस्था को लेकर कई आंकड़े साझा किए गए हैं। एक ओर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कम फसल की बात सामने आई है, वहीं दूसरी ओर एमआईएस के तहत खरीद और बागवानों को भुगतान की प्रक्रिया जारी है। अब भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन और शेष मामलों के भुगतान की स्थिति पर बागवानों की नजर रहेगी।