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बजट में ट्रेकिंग रूट्स के विकास की घोषणा का जानें हिमाचल पर क्‍या पड़ेगा असर

➤ बजट 2026 में हिमाचल में माउंटेन ट्रेल विकसित करने की घोषणा
➤ धौलाधार और पिन पार्वती जैसे लंबे ट्रेक रूट पर्यटन का नया आधार
➤ RDG ग्रांट बंद होने से राज्य को हजारों करोड़ का संभावित नुकसान



वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश करते हुए हिमाचल प्रदेश के लिए एक अहम पर्यटन घोषणा की है। बजट में प्रदेश के पहाड़ी और जंगली इलाकों में व्यवस्थित माउंटेन ट्रेल विकसित करने का प्रावधान किया गया है। माउंटेन ट्रेल ऐसे पथ या पगडंडियां होते हैं, जिनका उपयोग पैदल यात्रा, ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग और रोमांचक गतिविधियों के लिए किया जाता है। इस घोषणा को पर्यटन राज्य हिमाचल के लिए बड़ी राहत और अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

इन ट्रेल्स में लंबे और प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट शामिल किए जाएंगे। राज्य सरकार इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी। केंद्र से स्वीकृति और बजट मिलने के बाद चयनित ट्रेकिंग मार्गों को विकसित किया जाएगा, जिससे ट्रेकिंग प्रेमियों और एडवेंचर टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी।

हिमाचल का सबसे लंबा ट्रेक पिन पार्वती घाटी में स्थित है। लगभग 110 किलोमीटर लंबा यह ट्रेक मणिकर्ण से शुरू होकर लाहुल घाटी तक जाता है। इसमें पड़ने वाला पार्वती दर्रा 5400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे देश के सबसे खतरनाक ट्रेक में गिना जाता है। यदि इसे माउंटेन ट्रेल योजना में शामिल किया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय ट्रेकिंग मानचित्र पर प्रमुख स्थान पा सकता है।

जिला कांगड़ा की धौलाधार रेंज ट्रेकिंग रूट्स के लिहाज से सबसे समृद्ध क्षेत्र है। यहां शाहपुर के धारकंडी से लेकर बड़ा भंगाल तक 17 ट्रेकिंग रूट मौजूद हैं। इनमें 9 सरल, 3 कम जोखिम वाले और 5 जोखिम भरे ट्रेक शामिल हैं। नड्डी-करेरी, सतोवरी घेरा-करेरी, इंद्रुनाग-त्रियुंड, बिलिंग-राजगुंधा, नड्डी-गुणा मंदिर जैसे सरल रूट एक से दो दिन में पूरे किए जा सकते हैं। वहीं करेरी लेक, गज पास, जदरांगल जैसे रूट मध्यम श्रेणी में आते हैं। टंग नरवाणा, राजगुंधा-थमसर-बड़ा भंगाल, गलू-धर्मकोट-होली-मणिमहेश और सेवन लेक जैसे ट्रेक अत्यधिक जोखिम भरे माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन रूट्स को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया गया, तो हिमाचल में एडवेंचर टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और होमस्टे अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, एक ओर जहां माउंटेन ट्रेल की घोषणा उम्मीद जगा रही है, वहीं 16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल समेत छोटे राज्यों को RDG ग्रांट न देने की सिफारिश ने चिंता बढ़ा दी है। इस ग्रांट के बंद होने से प्रदेश को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। 15वें वित्त आयोग में हिमाचल को 35 से 40 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली थी। अब यह बंद होने से वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।