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हिमाचल प्रदेश: नौतोड़ जमीन पर जल्द फैसला! राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने उपायुक्तों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

➤ नौतोड़ मामले पर राज्यपाल ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों से रिपोर्ट मांगी

➤ राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी से दूसरी बार हुई मुलाकात, मामले पर काम शुरू

➤ पुराने मामलों, कार्रवाई और कानूनी स्थिति की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी


शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित नौतोड़ जमीन के मामले पर अब आगे की प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों से विस्तृत जानकारी मांगी है। राज्यपाल ने कहा है कि नौतोड़ का मामला उनके विचाराधीन है और इस पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। लोकभवन शिमला में कविता कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी से इस विषय पर दूसरी बार मुलाकात की है। राज्यपाल के अनुसार मामले पर काम शुरू हो गया है और यह विचार किया जा रहा है कि नौतोड़ के प्रावधानों के तहत पात्र लोगों को किस तरह लाभ दिया जा सकता है। सभी संबंधित पहलुओं की जांच के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

राज्यपाल ने बताया कि संबंधित जिलों के उपायुक्तों से अब तक हुई बैठकों और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर पुराने मामलों, अब तक हुई कार्रवाई और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद पात्र लोगों को नौतोड़ के तहत लाभ देने के लिए आगे की प्रक्रिया तय किए जाने की संभावना है।

लंबे समय से लंबित है नौतोड़ का मुद्दा

नौतोड़ जमीन का मुद्दा हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित है। राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी पहले भी राज्यपाल से इस मामले में जल्द निर्णय लेने का आग्रह कर चुके हैं। अगस्त में नेगी ने दावा किया था कि उपमंडल स्तर पर करीब 20 हजार नौतोड़ आवेदन और दावे लंबित हैं। उनके अनुसार पात्र परिवारों को जमीन मिलने से जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ सकते हैं और पलायन को रोकने में मदद मिल सकती है। यह आंकड़ा मंत्री की ओर से दिया गया दावा है।

जून में भी मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से मुलाकात कर जनजातीय क्षेत्रों के पात्र लोगों को नौतोड़ वन भूमि के आवंटन की अनुमति देने का आग्रह किया था। राज्य सरकार की ओर से वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत लागू प्रतिबंधों से छूट की मांग भी की गई है। यह मामला अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और वन कानूनों के कारण कानूनी पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है।

पात्रता और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

नौतोड़ जमीन से जुड़े मामलों में पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए स्पष्ट, समान और पारदर्शी दिशा-निर्देश की आवश्यकता पहले भी सामने रखी गई थी। अब उपायुक्तों से मांगी गई रिपोर्ट के माध्यम से लंबित मामलों और पहले की कार्रवाई की स्थिति को समझने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

मामले में एक तरफ पात्र लोगों को नौतोड़ के प्रावधानों के तहत लाभ देने का मुद्दा है, वहीं दूसरी तरफ वन कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़े पहलुओं की जांच भी आवश्यक है। इसी कारण आगे की प्रक्रिया में उपलब्ध रिकॉर्ड, पुराने मामलों और कानूनी स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा।

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मीडिया को बताया कि नौतोड़ के विषय पर उनकी राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी से दूसरी मुलाकात हुई है। राज्यपाल के अनुसार इस मामले पर काम शुरू किया जा चुका है और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।

फिलहाल राज्यपाल की ओर से उपायुक्तों से मांगी गई रिपोर्ट को नौतोड़ से जुड़े पुराने मामलों और मौजूदा स्थिति की समीक्षा की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। इसके बाद पात्र लोगों को लाभ देने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह समीक्षा और आगे लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।