➤ हिमाचल में नशे की जड़ पर चोट करेगा एनसीबी, पुलिस के साथ मिलकर बनेगी संयुक्त रणनीति
➤ एनसीबी के डीडीजी ने राजभवन में राज्यपाल से की मुलाकात, मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ भी हुई बैठकें
➤ चिट्टा तस्करी के सप्लायरों और संगठित सिंडिकेट का पूरा नेटवर्क ध्वस्त करने की बनी रणनीति
हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में एजेंसी के नॉर्थ वेस्टर्न रीजन के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (डीडीजी) और अतिरिक्त निदेशक ने शिमला का दौरा किया। उन्होंने प्रदेश में नशे की स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों को लेकर राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की।
बैठक के दौरान प्रदेश में नशे के मौजूदा परिदृश्य और केंद्र सरकार के विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल (2026-29) की प्रमुख प्राथमिकताओं की जानकारी दी गई। इस दौरान विजन डॉक्यूमेंट को जमीन पर लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। एनसीबी अधिकारियों ने प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के साथ भी बैठकें कीं।
मुख्य सचिव के साथ बैठक में प्रदेश में नशे की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने और केंद्र के विजन डॉक्यूमेंट (2026-29) के तहत तय प्राथमिकताओं को लागू करने पर चर्चा हुई। सीमावर्ती क्षेत्रों और नशे के कारोबार से प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ नशे के कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर भी रणनीति बनी।
प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के साथ बैठक में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त ऑपरेशन और अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। इसके अलावा चिट्टा तस्करी के मुख्य सप्लायरों, सप्लाई चेन और संगठित ड्रग सिंडिकेट की पहचान कर उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ।
अभिभावकों और समाज के लिए जरूरी जानकारी: नशे की लत से बच्चों और युवाओं को बचाने में परिवार की भूमिका सबसे अहम है। अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन, पढ़ाई से दूरी, अकेले रहने की आदत, पैसों की ज्यादा मांग, आंखों की लालिमा या नींद और भूख में बदलाव दिखे, तो उसे डांटने के बजाय संवाद करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें। नशे की लत एक बीमारी है और सही इलाज से इससे बाहर निकला जा सकता है। नशा मुक्ति के लिए सरकारी अस्पतालों और नशा मुक्ति केंद्रों में परामर्श व इलाज की सुविधा उपलब्ध है। नशा तस्करी की सूचना नजदीकी पुलिस थाने या नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की हेल्पलाइन मानस 1933 पर दी जा सकती है, जहां सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाती है।



