➤ हिमाचल पंचायत चुनाव का ऐलान, आचार संहिता लागू
➤ 31,182 सीटों पर चुनाव, 50 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे वोटिंग
➤ महिलाओं के लिए 15,656 सीटें आरक्षित, 21,678 पोलिंग स्टेशन तैयार
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का औपचारिक ऐलान हो गया है और इसके साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को दोपहर 3:40 बजे आयोजित प्रेस वार्ता में यह घोषणा की। इस दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने चुनाव प्रक्रिया, नियमों और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची पत्रकार वार्ता को संबोधित करते कहा कि आचार संहिता में सरकारी मिशनरियों का इस्तेमाल नहीं होगा। दो स्तर पर मतों की गणना होगी। प्रधान, उपप्रधान, सदस्य की गणना के बाद परिणाम आएंगे। मतदान केंद्रों में वीडियोग्राफी होगी। हिमाचल में पहला चरण 26 मई को है वहीं, दूसरा चरण 28 मई को होगा।
प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव 31,182 सीटों पर होंगे। हालांकि कुल्लू जिले की 4 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और पंचायत वार्ड सदस्य के लिए चुनाव नहीं होंगे। इन चुनावों में 50,79,048 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 25,67,770 पुरुष और 25,11,249 महिला मतदाता शामिल हैं। खास बात यह है कि 85 वर्ष से अधिक आयु के करीब 50 हजार मतदाता भी इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए इस बार 15,656 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पूरे प्रदेश में मतदान के लिए 21,678 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें से एक मतदान केंद्र 4587 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है, जो प्रदेश का सबसे ऊंचा पोलिंग स्टेशन माना जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार मतदाताओं को पांच अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर दिए जाएंगे। इनमें प्रधान के लिए हल्का हरा, उपप्रधान के लिए पीला, पंचायत सदस्य के लिए सफेद, पंचायत समिति के लिए गुलाबी और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का नीला बैलेट पेपर शामिल है। मतदान के दिन मतदाताओं को वेतन सहित अवकाश भी दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में भाग ले सकें।
आचार संहिता लागू होते ही सरकार पर कई प्रकार की पाबंदियां लग गई हैं। अब कोई भी नई घोषणा, भर्ती, टेंडर, ट्रांसफर, प्रमोशन या शिलान्यास नहीं किया जा सकेगा। यह संहिता चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार चुनाव आयोग को 31 मई से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तैयारियों में जुट गया है। इससे पहले प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव का भी ऐलान हो चुका है, जिसमें 51 निकायों में 17 मई और दो स्थानों पर 22 मई को मतदान होना है।
चुनाव नियमों के तहत सरकारी सेवाओं से हटाया गया व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेगा। यदि कोई शिकायत दर्ज होती है तो संबंधित उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है। वहीं सरकारी कर्मचारी किसी भी उम्मीदवार के एजेंट नहीं बन सकते, ऐसा करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा सरकार से मानदेय प्राप्त करने वाले व्यक्ति भी चुनाव नहीं लड़ सकते, जब तक वे अपनी नौकरी से इस्तीफा न दे दें।
दिलचस्प बात यह है कि पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की कोई अनिवार्यता नहीं रखी गई है, यानी अनपढ़ व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कदम लोकतंत्र में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।



