➤ 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से कर्मचारियों-पेंशनरों की देनदारियां चुकाने का भरोसा
➤ पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल 30 दिनों में निपटाने का आश्वासन
➤ केंद्र सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का आरोप
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर मिलने वाली वित्तीय सहायता से राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की सभी लंबित देनदारियों का भुगतान करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले चार माह में पेंशनरों की वित्तीय देनदारियों का भुगतान एकमुश्त नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
घुमारवीं में आयोजित संयुक्त पेंशनर संघ फ्रंट के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पेंशनरों को आश्वस्त किया कि सभी चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों की अदायगी 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रदेश के राजस्व में सुधार होगा, कर्मचारियों और पेंशनरों के एरियर समेत सभी लंबित देनदारियों को प्राथमिकता के आधार पर चुकाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी माता भी पेंशनर हैं और वे पेंशनरों की पीड़ा को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने पेंशनरों से चार माह का समय मांगते हुए भरोसा दिलाया कि उन्हें बुलाकर वार्ता की जाएगी और 2016 से लंबित सभी मांगों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लिए गए कठोर फैसले भविष्य की मजबूत नींव साबित होंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की योजनाओं के कारण राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में राज्य को अपने निर्धारित हिस्से से कहीं अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे 2022-23 से 2025-26 तक राज्य पर 175.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भुगतान में देरी हो रही है, तो इसके पीछे केंद्र की योजनाओं का अतिरिक्त बोझ और पूर्व सरकारों से मिली आर्थिक स्थिति जिम्मेदार है।
बोले – नड्डा दिलाएं आपदा राहत और कर्मचारियों का बकाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदेश दौरे के दौरान कहा था कि जितना मांगोगे उतना देंगे। इस पर उन्होंने आग्रह किया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की आपदा राहत और कर्मचारियों के लंबित 1600 करोड़ रुपये शीघ्र जारी करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश को विशेष राहत पैकेज मिलना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मकान निर्माण के लिए दी जाने वाली सहायता बेहद कम है, जबकि राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर सात लाख रुपये किया है। जीएसटी लागू होने के बाद हिमाचल को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्दी में देश की करीब 35 प्रतिशत दवाइयों का निर्माण होता है, लेकिन राजस्व में भारी गिरावट आई है।



