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हिमाचल पुलिस की एडवाइजरी: गाड़ी बेचकर निश्चिंत न हों, आरसी ट्रांसफर नहीं हुई तो पुराने मालिक पर आएगी आफत

गाड़ी बेचने के बाद आरसी ट्रांसफर न हुई तो पुराने मालिक की बढ़ सकती है परेशानी
हिमाचल पुलिस ने 14 और 30 दिन की प्रक्रिया का पालन करने की दी सलाह
फार्म-29, फार्म-30 समेत बिक्री के सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने को कहा


शिमला में हिमाचल पुलिस ने वाहन बेचने वाले मालिकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल गाड़ी और उसकी चाबी खरीदार को सौंप देने से वाहन की बिक्री की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जानी चाहिए। जब तक पंजीकरण प्रमाण पत्र यानी आरसी में नए मालिक का नाम दर्ज नहीं होता, तब तक पुराने मालिक के लिए भी कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है।

पुलिस के अनुसार वाहन बिक्री के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वामित्व हस्तांतरण कराना बेहद जरूरी है। यदि आरसी में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज रहता है और उस वाहन से कोई दुर्घटना हो जाती है, ई-चालान कटता है या किसी आपराधिक गतिविधि में वाहन का इस्तेमाल होता है तो पुराने मालिक से भी जवाब-तलब किया जा सकता है।

इसी को देखते हुए हिमाचल पुलिस ने वाहन बेचने और खरीदने वाले दोनों पक्षों को दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने तथा आरसी में नए मालिक का नाम अपडेट होने की पुष्टि करने की सलाह दी है।

गाड़ी बेचने के बाद सिर्फ चाबी सौंपना पर्याप्त नहीं

वाहन मालिक अक्सर गाड़ी बेचने के बाद यह मान लेते हैं कि खरीदार को वाहन सौंपने के साथ उनकी जिम्मेदारी भी खत्म हो गई। लेकिन पुलिस ने इस धारणा को लेकर सावधान किया है।

जब तक आरसी में स्वामित्व का हस्तांतरण दर्ज नहीं होता, तब तक सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम बना रह सकता है। ऐसे में वाहन से संबंधित किसी दुर्घटना, ई-चालान या आपराधिक गतिविधि की स्थिति में पुराने मालिक को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए पुलिस ने वाहन बेचने के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को समय पर पूरा करने और रिकॉर्ड में बदलाव की पुष्टि करने को जरूरी बताया है।

विक्रेता को 14 दिन के भीतर देनी होगी सूचना

हिमाचल पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार वाहन बेचने वाले यानी विक्रेता को बिक्री के 14 दिनों के भीतर फार्म-29 के माध्यम से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को वाहन के हस्तांतरण की सूचना देनी होगी।

यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दर्ज हो सके।

पुलिस ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि बिक्री के बाद इस प्रक्रिया को टालने के बजाय निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करें और इसकी रसीद तथा अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें।

खरीदार को 30 दिन के भीतर करना होगा आवेदन

दूसरी ओर, वाहन खरीदने वाले व्यक्ति की भी जिम्मेदारी तय है। पुलिस के अनुसार खरीदार को वाहन खरीदने के 30 दिनों के भीतर फार्म-30 के जरिए स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन करना होगा।

यानी वाहन की बिक्री के बाद विक्रेता और खरीदार दोनों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया और समय सीमा निर्धारित है। केवल वाहन अपने कब्जे में लेने से खरीदार की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत वाहन अपने नाम करवाना जरूरी है।

आरसी अपडेट हुई या नहीं, इसकी जरूर करें पुष्टि

पुलिस ने दोनों पक्षों को एक और महत्वपूर्ण सलाह दी है। आवेदन करने के बाद केवल यह मानकर न बैठें कि रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो गया होगा। वाहन पोर्टल और संबंधित रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपडेट हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

यदि स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद रिकॉर्ड में नाम अपडेट नहीं हुआ है तो संबंधित विभाग से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पुलिस ने कहा है कि आवेदन से जुड़ी रसीद, दस्तावेज और अन्य प्रमाण सुरक्षित रखना भी जरूरी है। भविष्य में किसी विवाद या वाहन से जुड़ी समस्या की स्थिति में ये दस्तावेज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

बिक्री के समय इन दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां रखें

हिमाचल पुलिस ने वाहन बेचने के समय दोनों पक्षों को जरूरी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अपने पास रखने की सलाह दी है। इनमें फार्म-29, फार्म-30, मूल आरसी, वैध बीमा और वाहन सुपुर्दगी रसीद शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार वाहन बिक्री के समय इन दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां विक्रेता और खरीदार दोनों के पास होनी चाहिए। इससे भविष्य में वाहन के स्वामित्व और सुपुर्दगी को लेकर किसी तरह का विवाद होने पर रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

खरीदार आरसी ट्रांसफर न करे तो विक्रेता क्या करे?

पुलिस ने ऐसी स्थिति के लिए भी वाहन बेचने वाले को सलाह दी है। यदि खरीदार जानबूझकर आरसी अपने नाम नहीं कराता, तो विक्रेता को चुप बैठने के बजाय तत्काल संबंधित आरटीओ को सूचना देनी चाहिए।

इसके लिए विक्रेता के पास बिक्री की तारीख, फार्म-29 और वाहन सुपुर्दगी रसीद जैसे दस्तावेज होने चाहिए। इन प्रमाणों के साथ आरटीओ को सूचना देने से यह रिकॉर्ड किया जा सकता है कि वाहन निर्धारित तारीख को खरीदार को सौंप दिया गया था।

दुर्घटना या अपराध होने पर बढ़ सकती है पुराने मालिक की चिंता

पुलिस की एडवाइजरी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि आरसी में नाम अपडेट नहीं होने की स्थिति में पुराने मालिक को भी जवाब देना पड़ सकता है। यदि वाहन किसी दुर्घटना में शामिल हो जाए, उस पर ई-चालान हो या किसी आपराधिक गतिविधि में उसका इस्तेमाल किया जाए, तो रिकॉर्ड में दर्ज पुराने मालिक तक भी जांच पहुंच सकती है।

ऐसे मामलों में वाहन बेचने की तारीख और स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज पुराने मालिक के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए पुलिस ने वाहन बेचने वालों से बिक्री के बाद पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा कराने और संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव की पुष्टि करने का आग्रह किया है।

पुलिस की सलाह: वाहन बेचें तो कागजी प्रक्रिया भी पूरी करें

हिमाचल पुलिस की इस एडवाइजरी का उद्देश्य वाहन बिक्री के बाद होने वाले संभावित कानूनी और दस्तावेजी विवादों से वाहन मालिकों को सावधान करना है। वाहन बेचने के बाद खरीदार को चाबी और गाड़ी सौंपना ही पर्याप्त नहीं है। दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वामित्व हस्तांतरण की निर्धारित प्रक्रिया पूरी हो और आरसी में नए मालिक का नाम दर्ज हो।

विक्रेता को 14 दिनों के भीतर फार्म-29 के जरिए आरटीओ को सूचना देने और खरीदार को 30 दिनों के भीतर फार्म-30 के माध्यम से स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। साथ ही आवेदन की रसीद और सभी संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा वाहन पोर्टल और रिकॉर्ड में नाम अपडेट होने की पुष्टि करने को कहा गया है।

पुलिस की सलाह साफ है कि गाड़ी बेचने के बाद निश्चिंत होने से पहले यह जरूर जांच लें कि सरकारी रिकॉर्ड में वाहन का मालिक वास्तव में बदल गया है या नहीं