➤ 642 टीजीटी प्रवक्ताओं को 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण करने का आदेश
➤ नशे, पॉक्सो व हेराफेरी में पकड़े गए शिक्षक-अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी
➤ आपदा में क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए किराये पर भवन उपलब्ध कराए जाएंगे
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने अपने ढांचे में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि हाल ही में पदोन्नत हुए 642 टीजीटी प्रवक्ताओं को 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है। यदि कोई प्रवक्ता इस अवधि में पद ग्रहण नहीं करता तो उसकी पदोन्नति रद्द कर दी जाएगी और यह अवसर अगले पात्र उम्मीदवारों को दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि विभाग में अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि स्कूलों का औचक निरीक्षण होगा और जिन शिक्षकों का कार्य असंतोषजनक पाया जाएगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। छात्र नामांकन के आधार पर विज्ञान शिक्षकों और अन्य पीजीटी के पदों का युक्तिकरण करने का निर्णय लिया गया। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम तीन से चार स्कूलों में सभी विषयों के शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों और अनावश्यक प्रतिनियुक्तियां रद्द की जाएं।
शिक्षा मंत्री ने विज्ञान विषय में घटते नामांकन पर चिंता जताते हुए कहा कि अधिक छात्रों को विज्ञान विषय चुनने के लिए सुविधाओं में सुधार किया जाए। साथ ही शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया गया कि जिन छात्रों के दस्तावेज आपदा में नष्ट हो गए हैं, उन्हें बिना शुल्क प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि जारी की जाए।
मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि नशे की हालत में पाए जाने वाले शिक्षक या अधिकारी, पॉक्सो मामलों और धन की हेराफेरी में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए प्रवक्ता कक्षा 6वीं से 10वीं तक पढ़ाने के आदेशों का पालन करेंगे और अगली बैठक में प्रत्येक जिला उपनिदेशक पांच स्कूलों की रिपोर्ट पेश करेंगे जहां यह व्यवस्था लागू की गई है।
बैठक में आपदा से प्रभावित स्कूल भवनों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अब तक 1,125 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं और विभाग को लगभग 59.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सरकार ने तय किया है कि छात्रों की पढ़ाई निर्बाध जारी रखने के लिए क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए किराये पर भवन लिए जाएंगे। वर्ष 2023 में 646 स्कूलों के लिए 51.13 करोड़ रुपये, जबकि सितंबर 2025 तक 77 स्कूलों के लिए 13.22 करोड़ रुपये जारी किए गए। मंडी जिला को सबसे अधिक 16.19 करोड़ रुपये मिले।
मंत्री ने निर्देश दिए कि आपदा पश्चात मूल्यांकन (PDNA) के तहत मिली धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग हो और 75% से अधिक क्षति वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए। पांच दिन में उपयोग रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य किया गया है, अन्यथा अप्रयुक्त राशि अन्य जरूरतमंद संस्थानों को दे दी जाएगी।



