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चंडीगढ़-मनाली फोरलेन लैंडस्लाइड से बंद, मंडी में कई सड़कें प्रभावित

➤ चंडीगढ़-मनाली फोरलेन लैंडस्लाइड से बंद, मंडी में कई सड़कें प्रभावित

➤ शिमला में CM आवास ओक ओवर के पास गिरे देवदार के पेड़, कोई हताहत नहीं

➤ 50 मीटर तक गिर सकती है विजिबिलिटी, 10 अगस्त को 7 जिलों में येलो अलर्ट


शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के बीच बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुक्रवार सुबह चंडीगढ़-मनाली फोरलेन मंडी जिले में द्वाड़ा से थलोट के बीच लैंडस्लाइड के कारण बंद हो गया। भारी बारिश के चलते पहाड़ियों से लगातार पत्थर और मलबा सड़क पर गिर रहा है। खतरे को देखते हुए हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

फोरलेन बंद होने से इस मार्ग पर सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़क किनारे और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का सिलसिला बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

CM के सरकारी आवास ओक ओवर के पास गिरे बड़े देवदार के पेड़

राजधानी शिमला में भी शुक्रवार सुबह बारिश और मौसम के बीच बड़ा हादसा होने से टल गया। मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर के समीप देवदार के कुछ बड़े पेड़ अचानक सड़क पर गिर गए। पेड़ गिरने के बाद सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई।

राहत की बात यह रही कि पेड़ गिरने की घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, सड़क पर पेड़ गिरने के बाद भी स्कूली बच्चे और आम लोग वहां से गुजरते दिखाई दिए। कई लोग पेड़ के नीचे से झुककर सड़क पार करते रहे।

शिमला जैसे संवेदनशील पहाड़ी शहर में सड़क के किनारे बड़े पेड़ों के गिरने से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। बारिश के दौरान मिट्टी नरम होने और पेड़ों की जड़ों के कमजोर पड़ने से इस तरह की घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

मंडी-पठानकोट हाईवे भी दो घंटे रहा बंद

बारिश के कारण मंडी-पठानकोट हाईवे भी शुक्रवार सुबह लैंडस्लाइड की चपेट में आ गया। पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण हाईवे पर करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

सड़क पर मलबा आने के बाद वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। संबंधित विभाग की मशीनरी ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया, जिसके बाद मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया गया।

लगातार बारिश के बीच पहाड़ी सड़कों पर अचानक मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं वाहन चालकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

मंडी-जोगेंद्रनगर सड़क पर भारी मलबा, PWD की मशीनरी जुटी

मंडी-जोगेंद्रनगर सड़क भी उरला के पास भारी मात्रा में मलबा आने के कारण बंद हो गई है। सड़क पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है।

सड़क बहाली के लिए PWD की मशीनरी मौके पर पहुंच गई है और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया जाए।

मंडी जिले में एक के बाद एक सड़क मार्गों के प्रभावित होने से बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

शिमला में घनी धुंध का अलर्ट, 50 मीटर तक रह सकती है विजिबिलिटी

बारिश और लैंडस्लाइड के बीच मौसम विभाग ने शिमला शहर में घनी धुंध को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार धुंध के कारण विजिबिलिटी घटकर 50 मीटर तक पहुंच सकती है।

कम विजिबिलिटी के कारण वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी सड़कों पर मोड़, ढलान और संकरे मार्गों पर वाहन चलाते समय गति कम रखने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक सोलन, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।

बिलासपुर और कांगड़ा में तेज बारिश का येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने 7 अगस्त को बिलासपुर और कांगड़ा जिले के कुछ स्थानों पर तेज बारिश की संभावना जताई है। दोनों जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हालांकि पिछले एक सप्ताह के दौरान हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून अपेक्षाकृत धीमा रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी अधिक रहा है।

प्रदेश के 9 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है, जबकि तीन जिलों में सामान्य से दोगुनी से अधिक बारिश हुई है। सिरमौर में सामान्य से 121 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत लाहौल-स्पीति में सामान्य से 94 फीसदी कम बारिश हुई है।

10 अगस्त से फिर सक्रिय होगा मानसून, 7 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 10 अगस्त से मानसून के फिर सक्रिय होने के आसार हैं। इस दिन प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए सात जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सोलन, शिमला, सिरमौर और किन्नौर में 10 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 12 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और यात्रा करने वालों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

बारिश के बाद दिन के तापमान में भी गिरावट

प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान हुई बारिश का असर दिन के तापमान पर भी देखने को मिला है। राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

कल्पा में तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस कम होकर 17.5 डिग्री दर्ज किया गया। नाहन में तापमान 4.1 डिग्री कम होकर 23.9 डिग्री रहा।

ऊना में तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री कम होकर 29.4 डिग्री, बिलासपुर में 2.8 डिग्री कम होकर 29 डिग्री और सोलन में 2.4 डिग्री कम होकर 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बारिश के कारण तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है, लेकिन दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड, पेड़ गिरने और कम विजिबिलिटी ने सड़क सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है।

बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर बढ़ा खतरा

हिमाचल में मानसून के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी सड़कों पर लैंडस्लाइड और अचानक पत्थर गिरने की रहती है। शुक्रवार को मंडी में चंडीगढ़-मनाली फोरलेन, मंडी-पठानकोट हाईवे और मंडी-जोगेंद्रनगर सड़क के प्रभावित होने से एक बार फिर यही स्थिति सामने आई।

शिमला में मुख्यमंत्री आवास के पास पेड़ों का गिरना भी बारिश के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों को सावधानी की जरूरत

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। खासकर 10 अगस्त को सात जिलों में येलो अलर्ट के कारण लोगों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।

पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों को लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में वाहन रोकने या खड़ा करने से बचना चाहिए। धुंध वाले क्षेत्रों में कम गति से वाहन चलाना और पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है।