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हिमाचल में 27 फरवरी से बदलेगा मौसम, जानें

➤ 27 फरवरी से वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय, ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश-बर्फबारी के आसार
➤ दो दिन मौसम खराब रहने की संभावना, तापमान में आएगी गिरावट
➤ बिलासपुर और बड़सर में घना कोहरा, विजिबिलिटी 50 मीटर से नीचे


हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुहिमाचल में 27 फरवरी से बदलेगा मौसमसार 27 फरवरी से प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से दो दिन तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हालांकि मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम साफ बना रह सकता है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड दोबारा बढ़ने के संकेत हैं।

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक 27 फरवरी को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों की अधिक ऊंची चोटियों पर हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसके बाद 28 फरवरी को मंडी और किन्नौर जिले के ऊंचाई वाले हिस्सों में भी इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। बर्फबारी और बारिश के बाद तापमान में हल्की गिरावट दर्ज होने की संभावना है। वर्तमान में प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री सेल्सियस अधिक और न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री अधिक चल रहा है, जिससे मौसम में असामान्य गर्माहट महसूस की जा रही है।

किन्नौर के कल्पा में अधिकतम तापमान में सामान्य से 7.6 डिग्री का उछाल दर्ज किया गया है, जिससे तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कांगड़ा में पारा सामान्य से 5.9 डिग्री अधिक होकर 26.2 डिग्री, भुंतर में 5.7 डिग्री अधिक होकर 24.8 डिग्री और शिमला में 4.6 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

प्रदेश के निचले इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिला। बिलासपुर शहर और हमीरपुर जिले के बड़सर में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा। विजिबिलिटी 50 मीटर से भी नीचे गिर गई, जिससे वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस सर्दी में प्रदेश में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। विंटर सीजन में 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि फरवरी माह में यह आंकड़ा सामान्य से 82 प्रतिशत कम रहा। एक से 23 फरवरी के बीच जहां सामान्य वर्षा 81.3 मिमी होती है, वहीं इस बार मात्र 14.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसी प्रकार एक जनवरी से 23 फरवरी के बीच सामान्य 166.6 मिमी की तुलना में 102.1 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आगामी बारिश और बर्फबारी से सूखे जैसे हालात में कुछ राहत मिल सकती है।