➤ हिमाचल युवा कांग्रेस के 13 पदाधिकारी तत्काल प्रभाव से निलंबित
➤ दिल्ली कार्यक्रम में अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए हुई कार्रवाई
➤ निलंबित में दो उपाध्यक्ष, आठ महासचिव और तीन सचिव शामिल
शिमला। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने पर प्रदेश युवा कांग्रेस के 13 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के नेतृत्व के निर्णय के बाद यह निलंबन तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक लागू रहेगा।
हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव (संगठन) आर्यन चौहान ने 2 नवंबर 2026 को इस संबंध में निलंबन आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि दिल्ली कार्यक्रम में पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है। आर्यन चौहान ने साफ किया कि संगठन में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इन 13 पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए पदाधिकारियों में दो प्रदेश युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष, आठ प्रदेश महासचिव और तीन प्रदेश सचिव शामिल हैं।
- प्रदेश उपाध्यक्ष: अमला कश्यप, अनु कुमारी मराठा
- प्रदेश महासचिव: साहिल ठाकुर, अजय ठाकुर, रविंद्र राव, सचिन ठाकुर, मनोज कुमार, पूजा ठाकुर, तजेंद्र कुमार, अंकुर शर्मा
- प्रदेश सचिव: यशपाल, अर्जुन सिंह, बलदेव सिंटियान
किसे भेजी गई आदेश की प्रति। निलंबन आदेश की प्रतियां भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव एवं हिमाचल के प्रदेश प्रभारी शेष नारायण ओझा और आईवाईसी के सचिव एवं सह-प्रभारी ज्योतिष एचएम को भेजी गई हैं। इसके अलावा प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर और कार्यकारी अध्यक्ष अखिल अग्निहोत्री को भी आदेश की जानकारी दी गई है।
कार्यक्रम को लेकर क्या स्थिति। आदेश में दिल्ली के कार्यक्रम की प्रकृति का अलग से विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन से जोड़ा गया है। इसी क्रम में पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी युवा कांग्रेस के 10 पदाधिकारियों को 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की “वोट चोरी रैली” में शामिल न होने पर निलंबित किया गया है। हालांकि हिमाचल के आदेश में अनुपस्थित रहने का कार्यक्रम इसी रैली को बताया गया है या नहीं, इसकी स्पष्ट पुष्टि आदेश से नहीं होती।
पहले भी हुई है ऐसी कार्रवाई। प्रदेश युवा कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इसी वर्ष सितंबर में कांगड़ा ज़िले के 15 पदाधिकारियों, जिनमें दस विधानसभा अध्यक्ष और पांच ब्लॉक अध्यक्ष शामिल थे, को राज्य कार्यकारिणी की बैठक से गैरहाज़िर रहने और संगठनात्मक गतिविधियों में निष्क्रियता के कारण निलंबित किया गया था। यह आदेश भी महासचिव (संगठन) आर्यन चौहान ने जारी किया था।
निलंबन अगले आदेश तक प्रभावी है, यानी संगठन आगे चलकर पदाधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद निलंबन वापस ले सकता है या कार्रवाई को आगे बढ़ा सकता है। निलंबित पदाधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस की युवा इकाई में संगठनात्मक गतिविधियों और ज़िम्मेदारियों के बंटवारे पर भी सबकी नज़र रहेगी।



