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एचपीयू में कौशल विकास कार्यक्रम, छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

एचपीयू हिंदी विभाग में कौशल विकास कार्यक्रम, 120 से अधिक छात्रों ने लिया भाग
कविता, वाद-विवाद और नाट्य मंचन से निखरी विद्यार्थियों की प्रतिभा
विशेषज्ञ बोले- कौशल आधारित कलाएं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर



शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के समरहिल परिसर में हिंदी विभाग द्वारा एक दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को नया मंच मिला। कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी सिंह के निर्देशन में किया गया, जबकि संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. सुनीता ठाकुर ने निभाई। इस आयोजन में करीब 120 शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी दर्ज करवाई

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:15 बजे हुआ और इसमें कविता पाठ, लघु कहानी, वाद-विवाद और लघु नाट्य मंचन जैसी विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अधिष्ठाता (योजना एवं शिक्षक मामले) प्रो. जोगिंद्र सिंह धीमान उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष द्वारा उनका स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया।

अपने संबोधन में प्रो. धीमान ने कहा कि कौशल आधारित कलाएं विज्ञान, परंपरा और भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें स्किल-बेस्ड लर्निंग को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव होता है। उन्होंने कहा कि कविता भावनाओं और विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई। वहीं, लघु कथाएं जीवन मूल्यों को सिखाने का माध्यम हैं और वाद-विवाद ज्ञान के प्रसार में सहायक होते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि लघु नाटक सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम हैं, जिनके जरिए समाज को आईना दिखाया जा सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने परंपरा और प्रणाली के अंतर को भी स्पष्ट किया और कहा कि परंपरा परिवर्तनशील होती है, जबकि प्रणाली वैज्ञानिक आधार पर स्थापित होती है।

विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी विभाग लगातार नवाचार की दिशा में काम कर रहा है और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं

कार्यक्रम को चार सत्रों में विभाजित किया गया, जिनमें सत्राध्यक्ष के रूप में डॉ. शोभा रानी, डॉ. नरेश कुमार और डॉ. सुनीता ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कविता पाठ के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों के साथ-साथ हास्य रचनाओं का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया।

लघु नाट्य मंचन में स्वतंत्रता संग्राम, भारत-पाक विभाजन, राष्ट्रीय चेतना, नशा, तनाव और अकेलेपन जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं को सशक्त तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया गया। वहीं, वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय ‘देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका’ रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार तार्किक और प्रभावशाली ढंग से रखे।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. नरेश कुमार ने मुख्य अतिथि, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक वर्ग, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। समग्र रूप से यह आयोजन कौशल विकास, रचनात्मकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में अत्यंत प्रभावी और प्रेरणादायक साबित हुआ