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नेताओं, मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकारों समेत फ्री बस सुविधा लेने वालों को अब हिमपास बनाना अनिवार्य, तीन माह के लगेंगे 200 रुपए

एचआरटीसी में अगले सप्ताह से 200 रुपये में हिम बस कार्ड बनना शुरू
बिना कार्ड निशुल्क और रियायती यात्रा का लाभ नहीं मिलेगा
तीन महीने में कार्ड बनाना अनिवार्य, हर साल 150 रुपये में रिन्यू होगा



हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी (हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) अगले सप्ताह से एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। अब प्रदेश में निशुल्क और रियायती यात्रा करने वाले यात्रियों को इसके लिए हिम बस कार्ड बनवाना अनिवार्य होगा। निगम ने इसका ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर लिया है और योजना को शुरू करने के लिए सरकार से औपचारिक अनुमति दो-तीन दिन में मिलने की उम्मीद है।

हिम बस कार्ड बनाने के लिए यात्रियों को 200 रुपये का शुल्क देना होगा। इस कार्ड के बिना किसी को भी एचआरटीसी की बसों में फ्री या हाफ किराये की सुविधा नहीं दी जाएगी। निगम ने लाभार्थियों को तीन महीने के भीतर कार्ड बनवाने की समयसीमा तय की है।

वर्तमान में महिलाओं को बस किराये में 50 प्रतिशत छूट दी जाती है, जबकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क यात्रा की सुविधा है। अब इन सभी को भी हिम बस कार्ड बनाना होगा। हर साल कार्ड को 150 रुपये देकर रिन्यू किया जा सकेगा।

एचआरटीसी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा सहित अन्य राज्यों के कुछ यात्री हिमाचल की इस रियायती योजना का लाभ उठा रहे थे, जिससे निगम को आर्थिक घाटा झेलना पड़ रहा है। इस स्थिति को रोकने के लिए अब पहचान प्रमाण पत्र (ID Proof) अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य में वर्तमान में 17 विभिन्न श्रेणियों को निशुल्क या रियायती यात्रा की सुविधा दी जा रही है — इनमें परिवहन निगम के कर्मचारी व सेवानिवृत्त, दिव्यांग, स्वतंत्रता सेनानी व उनके सहयोगी, युद्ध विधवाएं, पूर्व विधायक व सांसद, राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता, मान्यता प्राप्त संवाददाता, गंभीर रोगी आदि शामिल हैं।

निगम का कहना है कि यह कदम फर्जी पास और बाहरी राज्यों के दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ राज्य के वास्तविक लाभार्थियों तक सुविधा पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।