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आईजीएमसी में बनेगा मातृ एवं शिशु अस्पताल, सीएम के निर्देश

➤ आईजीएमसी में एकीकृत मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित करने की दिशा में पहल
➤ मरीजों के लिए प्रतीक्षा अवधि शून्य करने पर सरकार का फोकस
➤ स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक मशीनें और स्टाफ बढ़ाने के निर्देश


शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार सायं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में एकीकृत मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के निर्देश दिए। इसके लिए सचिव आशीष सिंहमार के नेतृत्व में एक समिति गठित करने को कहा गया है, जो अस्पताल के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करेगी ताकि इसका प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में नैदानिक सेवाओं के लिए मरीजों की प्रतीक्षा अवधि को शून्य करने के उपाय सुझाने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत मशीनें और उपकरण स्थापित कर रही है, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। साथ ही पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नैदानिक प्रणाली को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि इससे बीमारियों की सही पहचान और उपचार में मदद मिलती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सुधार के लिए धन की कोई कमी नहीं है और लगातार नए पद सृजित कर चिकित्सा, पैरामेडिकल और तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।

बैठक में सचिव आशीष सिंहमार, विशेष सचिव स्वास्थ्य जितेंद्र सांजटा, आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।