➤ कमला नेहरू अस्पताल शिफ्ट करने के फैसले के खिलाफ शिमला में जोरदार प्रदर्शन
➤ महिला समिति और नागरिक सभा ने शुल्क बढ़ोतरी को बताया जनविरोधी
➤ सरकार से फैसला वापस लेने की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिमला में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। कमला नेहरू अस्पताल (KNH) को शिफ्ट करने और सरकारी अस्पतालों में विभिन्न शुल्क बढ़ाने के फैसले के खिलाफ जनवादी महिला समिति और नागरिक सभा ने आईजीएमसी अस्पताल के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस निर्णय को आम जनता के खिलाफ बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
धरने के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि कमला नेहरू अस्पताल शहर के बीचों-बीच स्थित है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इलाज के लिए आसानी रहती है। यदि अस्पताल को शहर से दूर शिफ्ट किया जाता है, तो मरीजों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष फाल्मा चौहान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह जनविरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में टेस्ट, इलाज और अन्य सुविधाओं के शुल्क बढ़ाने से गरीब और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता के लिए यह निर्णय और मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार बिना जनता की राय लिए ऐसे बड़े फैसले ले रही है, जो आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अस्पताल शिफ्ट करने का निर्णय और शुल्क वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे KNH अस्पताल को हटाने की योजना को लेकर लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि यह कदम जनहित के साथ खिलवाड़ है और इससे खासकर दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ेगी।



