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कांगड़ा-चंबा में सुबह-सुबह कांपी धरती, 3.2 तीव्रता का भूकंप, जमीन से 15 किमी नीचे केंद्र, घरों से बाहर निकले लोग, कहीं नुकसान नहीं

➤ कांगड़ा और चंबा में शुक्रवार सुबह 6:59 बजे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.2

➤ NCS के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से 15 किमी नीचे, जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं

➤ सीस्मिक जोन-5 में आते हैं दोनों जिले, समय-समय पर आते रहते हैं कम तीव्रता के झटके


हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 6 बजकर 59 मिनट 46 सेकेंड पर आए इस भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.2 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर नीचे था। राहत की बात यह रही कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

झटके महसूस होते ही कई लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। सुबह का समय होने के कारण ज्यादातर लोग घरों में ही थे और कुछ देर तक इलाके में दहशत का माहौल रहा। कांगड़ा और चंबा जिले भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील सीस्मिक जोन-5 में आते हैं। इस क्षेत्र में समय-समय पर कम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, 5.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर बड़े नुकसान का कारण नहीं बनते। हालांकि, 5.0 या इससे अधिक तीव्रता के भूकंप में जान-माल के नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। नुकसान केवल तीव्रता पर ही नहीं, बल्कि केंद्र की गहराई, जमीन की बनावट और इमारतों की मजबूती पर भी निर्भर करता है। इसलिए कमजोर या पुराने निर्माण वाले इलाकों में कम तीव्रता के झटके भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

रिक्टर स्केल लघुगणकीय (logarithmic) पैमाना है। इसमें तीव्रता का हर अगला स्तर पिछले स्तर के मुकाबले भूकंपीय तरंगों के आयाम में करीब 10 गुना अधिक होता है, जबकि मुक्त होने वाली ऊर्जा लगभग 32 गुना बढ़ जाती है। यानी 3.2 और 5.2 तीव्रता के बीच का अंतर आंकड़ों में सिर्फ 2 अंक दिखता है, लेकिन असल में बहुत बड़ा होता है।

जानकारी और सावधानियां: हिमाचल का कांगड़ा क्षेत्र इतिहास में 1905 के भीषण भूकंप का गवाह रह चुका है, जिसमें भारी तबाही हुई थी। इसी कारण यहां भूकंप को लेकर सतर्कता जरूरी है। भूकंप आने पर घबराने के बजाय झुकें, ढकें और पकड़ें (Drop, Cover, Hold On) का तरीका अपनाएं। यानी मजबूत मेज या पलंग के नीचे शरण लें, सिर और गर्दन को बचाएं और झटके रुकने तक वहीं रहें। झटकों के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और खिड़की, शीशे व भारी सामान से दूर रहें। झटके थमने के बाद सीढ़ियों से खुले स्थान पर जाएं और बिजली व गैस की आपूर्ति बंद रखें। घर में टॉर्च, प्राथमिक उपचार किट, पीने का पानी और जरूरी दस्तावेज एक जगह तैयार रखें। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।