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कांगड़ा में चिट्टा तस्करी मामले में 1.01 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, पुलिस ने घर और कार पर लगाया बोर्ड

➤ कांगड़ा के छन्नी गांव में 1.01 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज

➤ मकान, घरेलू सामान और कार पर पुलिस ने लगाया फ्रीजिंग आदेश का बोर्ड

➤ वर्ष 2017 के चिट्टा तस्करी मामले में सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के बाद कार्रवाई


नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नूरपुर पुलिस ने कांगड़ा जिले के इंदौरा क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छन्नी गांव में 1 करोड़ 1 लाख 55 हजार 718 रुपये की संपत्तियों को फ्रीज करने संबंधी आदेश का बोर्ड लगाया है। इन संपत्तियों में आवासीय मकान, घरेलू सामान और एक कार शामिल है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई वर्ष 2017 में पुलिस थाना इंदौरा में दर्ज चिट्टा तस्करी के मामले में सक्षम प्राधिकारी की ओर से संपत्ति फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि होने के बाद की गई है।

कार्रवाई के दौरान डीएसपी संजीव यादव और पुलिस थाना प्रभारी आशीष पठानिया सहित पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। संपत्तियों पर बोर्ड लगाकर फ्रीजिंग आदेश की जानकारी दी गई। पुलिस की इस कार्रवाई को नशा तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मकान, घरेलू सामान और कार संपत्ति फ्रीजिंग के दायरे में

नूरपुर पुलिस के अनुसार, छन्नी गांव में जिन संपत्तियों पर फ्रीजिंग आदेश लागू किया गया है, उनमें एक आवासीय मकान, घरेलू सामान और एक कार शामिल हैं। इन सभी संपत्तियों का कुल मूल्य 1,01,55,718 रुपये बताया गया है।

पुलिस ने संबंधित संपत्तियों पर आदेश से जुड़ा बोर्ड लगाया है, ताकि संपत्तियों के फ्रीज किए जाने की जानकारी स्पष्ट हो सके। यह कार्रवाई वर्ष 2017 में दर्ज चिट्टा तस्करी के मामले से संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई का उद्देश्य संबंधित संपत्तियों के संबंध में कानून के तहत प्रतिबंध लागू करना है। हालांकि, फ्रीजिंग आदेश अपने आप में संपत्ति की अंतिम जब्ती या किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के समान नहीं होता। मामले में आगे की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अनुसार चलेगी।

वर्ष 2017 के मामले में हुई कार्रवाई

यह मामला पुलिस थाना इंदौरा में वर्ष 2017 में दर्ज चिट्टा तस्करी के प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, संपत्ति फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि सक्षम प्राधिकारी से होने के बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

नूरपुर पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित संपत्तियों पर बोर्ड लगाया। कार्रवाई में डीएसपी संजीव यादव और थाना प्रभारी आशीष पठानिया सहित पुलिस कर्मी मौजूद रहे।

पुराने मामले में संपत्तियों को फ्रीज करने की यह कार्रवाई नशा तस्करी से जुड़े मामलों में आर्थिक पहलुओं की जांच के महत्व को भी दर्शाती है। ऐसे मामलों में पुलिस का ध्यान केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कथित अवैध कमाई से जुड़ी संपत्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

नशा तस्करी के आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिश

नूरपुर पुलिस के अनुसार, नशा तस्करी से कथित तौर पर अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार से होने वाले आर्थिक लाभ पर रोक लगाना और इससे जुड़े नेटवर्क को कमजोर करना है।

पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ अभियान के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। संपत्ति फ्रीजिंग जैसे कदमों के माध्यम से अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी युवाओं और परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में नशे की आपूर्ति और कथित अवैध कमाई से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोपों, संपत्ति के स्रोत और संबंधित व्यक्तियों की कानूनी स्थिति का निर्धारण नियमानुसार जांच और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।