➤ कांगड़ा सहकारी बैंक के निदेशक मंडल का कार्यकाल विस्तार प्रस्ताव खारिज
➤ चुनाव समय पर न हुए तो सरकार को प्रशासक नियुक्त करना पड़ सकता है
➤ आरसीएस ने कहा सहकारी अधिनियम में कार्यकाल विस्तार का प्रावधान नहीं
हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं विभाग के पंजीयक (आरसीएस) ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (केसीसीबी) लिमिटेड धर्मशाला के निदेशक मंडल को बड़ा झटका दिया है। आरसीएस कार्यालय ने निदेशक मंडल के कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। यदि समय रहते चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो प्रदेश सरकार को बैंक में प्रशासक नियुक्त करना पड़ सकता है।
केसीसी बैंक के निदेशकों का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है, और नियमों के अनुसार, कार्यकाल पूरा होने से 90 दिन पहले चुनाव की प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य है। वर्तमान निदेशक मंडल का कार्यकाल सितंबर 2025 में समाप्त हो रहा है, अतः चुनाव प्रक्रिया 30 जून 2025 से शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन निदेशक मंडल ने हाल ही में बैठक कर कार्यकाल विस्तार के लिए प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें यह दलील दी गई थी कि प्रदेश में बरसात के मौसम में चुनाव कराना कठिन होगा।
हालांकि आरसीएस डॉ. आरके प्रूथी (आईएएस) ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि हिमाचल प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम-1968 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बोर्ड का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक बढ़ाने की अनुमति मिलती हो। उन्होंने अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं धर्मशाला को उचित कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए हैं।
बैंक के मौजूदा चेयरमैन कुलदीप पठानिया की नियुक्ति वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। केसीसीबी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों से कुल 16 निदेशक शामिल हैं, जो पिछले पांच साल पहले चुनाव के जरिए चुने गए थे। अब यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो नियमानुसार सरकार को प्रशासक नियुक्त करना होगा।



