➤ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत की
➤ महापुरुषों के इतिहास से छेड़छाड़ पर कड़ी कार्रवाई की मांग
➤ ‘राजपूत कल्याण बोर्ड’ और स्वर्ण आयोग की स्थापना की अपील
पराक्रम चंद, शिमला
देश में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र तंवर ने रविवार को शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहा कि अब समय आ गया है जब आरक्षण नीति की पुनः समीक्षा की जाए और इसे जातिगत नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि आज भी देश में कई ऐसे वर्ग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं लेकिन उन्हें जातिगत कारणों से किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही। इसके विपरीत, एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ जातिगत आरक्षण का लाभ उठा रही हैं।
महेंद्र तंवर ने यह भी आरोप लगाया कि देश के कई महापुरुषों के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी भ्रमित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं, इसलिए सरकार को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतिहास से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
महासभा ने केंद्र सरकार से यह भी मांग की है कि देशभर में ‘राजपूत कल्याण बोर्ड’ का गठन किया जाए, ताकि क्षत्रिय समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान सुनियोजित तरीके से हो सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सभी राज्यों में स्वर्ण आयोग के गठन की मांग की ताकि सामान्य वर्ग की भी आवाज नीतिगत स्तर पर सुनी जा सके।
महेंद्र तंवर ने कहा कि देश में सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए आरक्षण प्रणाली में बदलाव अनिवार्य हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि अब सभी वर्गों को समान अवसर मिले और इसका आधार केवल आर्थिक स्थिति हो, जाति नहीं। महासभा का मानना है कि समानता और समरसता की भावना तभी आएगी जब नीति निर्धारण में सभी वर्गों को तटस्थता और न्याय के साथ देखा जाए।



