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मणिमहेश यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू, श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत

मणिमहेश यात्रा 2026 के लिए हेलीकॉप्टर सेवा बुधवार सुबह से शुरू
भरमौर से गौरीकुंड 7 और होली से 10 मिनट में पहुंचेगा हेलीकॉप्टर
फर्जी टिकट से बचने के लिए आधिकारिक वेबसाइट से ही करें ऑनलाइन बुकिंग


भरमौर। उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं के लिए बुधवार सुबह से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद भरमौर और होली से गौरीकुंड के लिए हेली टैक्सी सेवा का संचालन शुरू किया गया। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों से मणिमहेश यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को कठिन पैदल चढ़ाई से राहत मिलेगी और वे कम समय में पवित्र मणिमहेश शिवकुंड के समीप पहुंच सकेंगे।

प्रशासन के अनुसार हेलीकॉप्टर श्रद्धालुओं को भरमौर और होली से मणिमहेश के शिवकुंड से करीब एक किलोमीटर नीचे स्थित गौरीकुंड तक पहुंचाएगा। इस बार यात्रा के दौरान कुल चार हेली टैक्सियां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उपलब्ध रहेंगी। इनमें दो हेलीकॉप्टर भरमौर से गौरीकुंड और दो हेलीकॉप्टर होली से गौरीकुंड के लिए उड़ान भरेंगे।

भरमौर से गौरीकुंड के लिए उड़ान भरते हुए हेलीकॉप्टर।

भरमौर से 7 और होली से 10 मिनट में गौरीकुंड

हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से मणिमहेश पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का समय काफी कम हो जाएगा। भरमौर से गौरीकुंड की हवाई दूरी तय करने में करीब 7 मिनट, जबकि होली से गौरीकुंड पहुंचने में लगभग 10 मिनट लगेंगे। हालांकि गौरीकुंड से आगे मणिमहेश शिवकुंड तक श्रद्धालुओं को परिस्थितियों और उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार आगे की यात्रा करनी होगी।

हेली सेवा विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आई है, जिनके लिए लंबी और कठिन पैदल यात्रा करना मुश्किल होता है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में खड़ी चढ़ाई और कम ऑक्सीजन के कारण मणिमहेश यात्रा शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

टिकट बुकिंग में सावधानी जरूरी, फर्जी वेबसाइट और एजेंटों से रहें दूर

हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने के साथ ही भरमौर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए विशेष अपील जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हेली टैक्सी के टिकट की बुकिंग मणिमहेश यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही की जाए।

श्रद्धालुओं को अनधिकृत वेबसाइटों, एजेंटों या सोशल मीडिया पर उपलब्ध किसी संदिग्ध लिंक के माध्यम से टिकट बुक नहीं करने की सलाह दी गई है। प्रशासन के मुताबिक फर्जी वेबसाइटों के जरिए टिकट के नाम पर ठगी की आशंका से बचने के लिए श्रद्धालु आधिकारिक माध्यम का ही इस्तेमाल करें।

आधिकारिक वेबसाइट पर हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग के साथ-साथ यात्रा से संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश और अन्य जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। ऑफलाइन टिकट की सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में गौरीकुंड से भरमौर की एकतरफा वापसी के लिए ऑफलाइन टिकट का विकल्प मिल सकता है।

मंगलवार को DGCA अनुमति का इंतजार करते रहे श्रद्धालु

हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से एक दिन पहले मंगलवार को श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा था। दरअसल, DGCA की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण उस दिन हेली सेवा शुरू नहीं हो पाई थी। हेलीपैड पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सेवा शुरू होने की उम्मीद में पहुंचे थे, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

बुधवार को DGCA से अनुमति मिलने के बाद आखिरकार हेलीकॉप्टर सेवा शुरू कर दी गई। इससे उन श्रद्धालुओं को राहत मिली है, जो यात्रा के दौरान हेली टैक्सी के माध्यम से गौरीकुंड पहुंचने की योजना बना रहे थे।

हड़सर से शुरू होती है पैदल यात्रा

मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह समझना जरूरी है कि भरमौर पहुंचने के बाद यात्रा का अगला प्रमुख पड़ाव हड़सर है। चंबा से भरमौर पहुंचने के बाद श्रद्धालु सड़क मार्ग से भरमौर से करीब 11 किलोमीटर आगे हड़सर तक वाहन से पहुंच सकते हैं। हड़सर से आगे मणिमहेश की पैदल यात्रा शुरू होती है।

हड़सर से पवित्र मणिमहेश झील यानी शिवकुंड तक की दूरी 13 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। रास्ते में कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा शारीरिक रूप से कठिन हो सकती है।

हेली सेवा में गौरीकुंड तक पहुंचने की सुविधा मिलने से पैदल यात्रा का कठिन हिस्सा काफी कम हो जाता है, हालांकि श्रद्धालुओं को मौसम, प्रशासनिक दिशा-निर्देश और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही यात्रा करनी चाहिए।

यात्रा मार्ग पर इन स्थानों पर ठहरने की सुविधा

मणिमहेश यात्रा के पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विभिन्न स्थानों पर टेंट की व्यवस्था रहती है। इनमें धनछो, सुंदरासी, गौरीकुंड और मणिमहेश शिवकुंड के आसपास के क्षेत्र प्रमुख हैं।

यात्रा के दौरान टेंट में ठहरने के लिए प्रति बिस्तर करीब 250 से 350 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को रात में ठहरने और यात्रा के दौरान अपनी आवश्यक सामग्री के लिए पहले से तैयारी रखने की सलाह दी जाती है।

13 हजार फीट की ऊंचाई पर है पवित्र मणिमहेश झील

मणिमहेश यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी यात्रा भी है। पवित्र मणिमहेश झील करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके सामने श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मणिमहेश कैलाश पर्वत है, जिसकी ऊंचाई 18 हजार फीट से भी अधिक बताई जाती है।

यात्रा के दौरान ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम और ऑक्सीजन की स्थिति बदलती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को जल्दबाजी के बजाय अपनी शारीरिक क्षमता और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा पूरी करने की सलाह दी जाती है।

बिना पंजीकरण यात्रा की अनुमति नहीं

मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। श्रद्धालु ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना पंजीकरण के यात्रा की अनुमति नहीं होगी। इसलिए मणिमहेश जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू करने से पहले अपना पंजीकरण पूरा कर लेना चाहिए और संबंधित प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

19 सितंबर को राधाष्टमी के साथ होगा यात्रा का समापन

मणिमहेश यात्रा 2026 का समापन 19 सितंबर 2026 को राधाष्टमी के शुभ अवसर पर होगा। इस दौरान राधाष्टमी स्नान को यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राधाष्टमी स्नान का शुभ मुहूर्त 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से शुरू होकर 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे तक रहेगा। इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मणिमहेश पहुंचने की संभावना है।

यात्रा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए एक अतिरिक्त और तेज परिवहन विकल्प उपलब्ध हो गया है।

श्रद्धालुओं के लिए सबसे जरूरी संदेश

मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हेलीकॉप्टर टिकट केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही बुक करें। किसी अनजान एजेंट, सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप लिंक या अनधिकृत वेबसाइट के झांसे में आकर भुगतान न करें। यात्रा से पहले पंजीकरण पूरा करना, मौसम की स्थिति देखना और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।

आधिकारिक वेबसाइट: manimaheshyatra.hp.gov.in