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नूरपुर वन मंडल में खैर कटान पर सवाल: फॉरेस्ट गार्ड और ARO की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल


➤ ज्वाली रेंज की गुरियाल वीट में खैर के पेड़ उखाड़ने और लकड़ी उठाने का मामला सामने आया
➤ फॉरेस्ट गार्ड के निर्देश पर लकड़ी लोड करने का दावा, अनुमति और संपत्ति मार्क पर सवाल
➤ ठेकेदार के डंप पर बिना संपत्ति मार्क खैर वुड मिलने से विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


रैहन: नूरपुर वन मंडल के तहत ज्वाली रेंज की गुरियाल वीट में खैर के पेड़ों से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि क्षेत्र में खैर के कई पेड़ों को जड़ से उखाड़ा गया और लकड़ी को बिना उचित अनुमति के मौके से उठाया गया।

सूत्रों के अनुसार जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची तो वहां एक वाहन में खैर के माछों को लोड किया जा रहा था। इस दौरान ठेकेदार के मुंशी ने बताया कि वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के कहने पर लकड़ी को यहां से लोड कर रैहन ले जाया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मौके पर लकड़ी के डंप की कोई वैध अनुमति मौजूद नहीं थी। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर फॉरेस्ट गार्ड ने किस आधार पर लकड़ी उठाने के निर्देश दिए

मामले की सूचना मिलने के बाद रैहन ब्लॉक से ब्लॉक अधिकारी जीवन भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वाहन में लोड लकड़ी और उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां से पेड़ों को काटा गया था। जांच में सामने आया कि पेड़ मलकियत भूमि से काटे गए थे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बिना अनुमति लकड़ी को कहां ले जाया जा रहा था।

जब जड़ से उखाड़े गए पेड़ों के बारे में फॉरेस्ट गार्ड से पूछा गया तो शुरुआत में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। बाद में उन्होंने कहा कि इन पेड़ों की डैमेज रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि उखाड़े गए पेड़ों को ठेकेदार के डंप स्थल पर रखा गया है।

इसके बाद जब डंप स्थल का निरीक्षण किया गया तो वहां रखी खैर की लकड़ी और हार्टवुड पर कोई संपत्ति मार्क नहीं मिला, जबकि नियमों के अनुसार डंप पर रखी लकड़ी पर संपत्ति मार्क होना अनिवार्य होता है।

निरीक्षण के दौरान यह संकेत भी मिले कि जितने पेड़ों को उखाड़ने की अनुमति दी गई थी, उससे अधिक पेड़ उखाड़े गए हो सकते हैं। इससे पूरे मामले को लेकर लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में फॉरेस्ट गार्ड और संबंधित वन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र की निगरानी करना और अवैध कटान रोकना वन विभाग की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी नूरपुर वन मंडल की विभिन्न वीटों में अवैध कटान के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में ज्वाली रेंज की गुरियाल वीट से फिर इस तरह का मामला सामने आना विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।

मामले को लेकर वन मंडल अधिकारी नूरपुर संदीप कोहली से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। ऐसे में इस पूरे मामले पर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है