Follow Us:

पेंशन समय पर न मिलने पर भड़के पेंशनर्स, शिमला में किया प्रदर्शन

  • वित्तीय लाभ और पेंशन समय पर न मिलने से राज्य पेंशनर्स संघ का शिमला में प्रदर्शन।

  • प्रदेशभर से पेंशनर्स ने चौड़ा मैदान में धरना देकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।

  • संघ ने सरकार को चेतावनी दी—यदि बकाया वित्तीय लाभ जारी नहीं हुए तो उग्र आंदोलन होगा।



Pensioners Protest: वित्तीय लाभ और समय पर पेंशन न मिलने को लेकर भारतीय राज्य पेंशनर्स संघ ने बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए पेंशनर्स ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। संघ की मुख्य मांग थी कि पेंशनर्स को समय पर पेंशन दी जाए और बकाया वित्तीय लाभों का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।

संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में पूर्व कर्मचारियों को पेंशन मिलने में देरी हो रही है। यही नहीं, दो वर्षों से चिकित्सा बिलों का भुगतान भी नहीं किया गया है, जिससे कई पेंशनर्स इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। उन्होंने सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इन दो वर्षों में कोई विधायक या मंत्री बीमार नहीं हुआ? क्या उनके चिकित्सा बिल भी रोके गए हैं? यदि विधायकों और मंत्रियों के चिकित्सा बिलों का भुगतान किया जा रहा है, तो पेंशनर्स के बिल क्यों रोके जा रहे हैं?

संघ ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि समय रहते पेंशन और चिकित्सा बिलों का भुगतान नहीं किया गया तो पेंशनर्स सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।


हिमाचल प्रदेश में पेंशनर्स के लंबित वित्तीय लाभों और समय पर पेंशन न मिलने को लेकर भारतीय राज्य पेंशन महासंघ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में हुए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार की संवेदनहीनता की निंदा करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से पूर्व कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ते के भुगतान के लिए एक पैसा तक नहीं दिया गया।

घनश्याम शर्मा ने कहा कि जो लोग जीवनभर प्रदेश की सेवा में लगे रहे, उन्हें बुजुर्गावस्था में इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकार की इस लापरवाही के कारण कई पेंशनर्स इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि क्या इन दो वर्षों में कोई मंत्री, विधायक या स्वयं मुख्यमंत्री बीमार नहीं हुआ? अगर उनके चिकित्सा बिलों का भुगतान हो रहा है, तो पेंशनर्स के बिल क्यों रोके जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विधायकों और मंत्रियों के चिकित्सा बिलों का भुगतान हुआ या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने पेंशनर्स को एक किस्त के रूप में पूर्व भुगतान दिया था, जबकि वर्तमान सरकार ने दो वर्षों में एक पैसा भी जारी नहीं किया।

घनश्याम शर्मा ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब होने की बात कहने वाली सरकार खुद के खर्चों पर अंकुश नहीं लगा रही है। मंत्रियों, अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए कई गाड़ियां और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि पेंशनर्स इलाज के लिए तरस रहे हैं।

संघ ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले समय में प्रदेशभर में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।