➤ पौंग झील किनारे कई स्थानों पर मृत मिले विदेशी प्रवासी पक्षी
➤ वर्ड फ्लू या जहरीली दवाइयों से मौत को लेकर उठे सवाल
➤ वन्य प्राणी विभाग की भूमिका पर पर्यावरण प्रेमियों ने जताई नाराजगी
दौलत चौहान
जवाली, कांगड़ा क्षेत्र में स्थित पौंग झील के किनारे प्रवासी परिंदों के मृत मिलने से इलाके में दहशत और चिंता का माहौल बन गया है। झील किनारे वन्य प्राणी विभाग की भूमि पर कई जगहों पर विदेशी परिंदे मृत अवस्था में पाए गए हैं, जिससे लोगों के मन में वर्ड फ्लू को लेकर आशंका गहराने लगी है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इससे पहले भी दो-तीन वर्ष पूर्व पौंग झील क्षेत्र में वर्ड फ्लू फैलने से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की मौत हुई थी। अब एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या ये मौतें वर्ड फ्लू के कारण हो रही हैं या फिर जानबूझकर जहरीली दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है।

पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि वन्य प्राणी विभाग की जमीन पर प्रतिबंध के बावजूद खेती की जा रही है और इसी की आड़ में प्रवासी परिंदों का शिकार किया जा रहा है। उनका कहना है कि फसलों में जहरीली दवाइयों का छिड़काव कर पक्षियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि झील किनारे हाल ही में विस्फोटक सामग्री के कारण गायों के जबड़े उड़ने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे आशंका है कि इसी तरह की सामग्री का इस्तेमाल प्रवासी पक्षियों के शिकार में भी किया जा रहा है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि कुछ लोग जंदरियां लगाकर भी प्रवासी परिंदों को मार रहे हैं। इससे पहले भी झील किनारे पंखों के ढेर मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन तब विभागीय अधिकारियों ने यह कहकर मामला टाल दिया था कि सियारों द्वारा शिकार किया गया है।
हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि वास्तविकता में यह संगठित शिकार का मामला है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया कि लगातार प्रवासी पक्षियों को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन वन्य प्राणी विभाग इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहा। उन्होंने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।



