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लाहौल घाटी के नालडा गांव में पारंपरिक पुनाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया।
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उत्सव में भेदभाव मिटाने की परंपरा निभाई गई और धरती पूजन का आयोजन हुआ।
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मान्यता है कि इस उत्सव के दौरान देवी-देवता स्वर्ग से नीचे उतरते हैं और सूरज-चंद्र क्षणभर के लिए स्थिर हो जाते हैं।
Himachal Pradesh Festivals: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल घाटी में पुनाह उत्सव पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन पटृन घाटी के नालडा गांव में हुआ, जहां सैकड़ों लोग इस अनोखे पर्व के साक्षी बने।
पुनाह उत्सव की अनूठी परंपरा और मान्यताएँ
पुनाह उत्सव का मुख्य आकर्षण धरती पूजन होता है, जिसमें पूरे गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा धारण कर एकत्र होते हैं और प्रकृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस दौरान भेदभाव मिटाने की परंपरा को भी निभाया जाता है, जिसमें सभी समाज के लोग एक साथ पूजा में भाग लेते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान के दौरान देवी-देवता स्वर्ग से तीन पौड़ी (सीढ़ियाँ) नीचे उतरते हैं, और कुछ क्षणों के लिए सूरज और चंद्रमा स्थिर हो जाते हैं। यह अनुष्ठान प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिक भागीदारी
यह उत्सव लाहौल घाटी की सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिकता का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग समान भाव से शामिल होते हैं। पारंपरिक नृत्य, संगीत और उत्सव की धूम इसे और भी विशेष बनाती है। पुनाह उत्सव प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।



