➤ आरडीजी बंद करने के प्रस्ताव पर सर्वदलीय बैठक में तीखी बहस
➤ भाजपा ने बीच बैठक में किया वॉकआउट, मुख्यमंत्री ने बताया निंदनीय कदम
➤ कांग्रेस, माकपा, आप और बसपा ने आरडीजी बहाली के लिए केंद्र से मिलने की जताई इच्छा
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद करने के प्रस्ताव को लेकर हिमाचल की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर लंबी और गंभीर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आरडीजी को वापस लेना प्रदेश की आर्थिकी के लिए बेहद चिंताजनक है और इससे हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य पर सीधा वित्तीय दबाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, जिसकी व्यवस्था वर्ष 1952 से लागू है। इसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को संतुलित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर इसे बंद किया गया तो राज्य की विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल में आरडीजी के रूप में लगभग 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर करीब 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि वर्तमान सरकार को अब तक केवल लगभग 17,000 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। ऐसे में अनुदान बंद करने का प्रस्ताव राज्य के साथ अन्याय है।
बैठक के दौरान भाजपा द्वारा बीच में ही वॉकआउट करने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा इस गंभीर विषय पर भी राजनीति कर रही है और प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए ठोस रुख अपनाने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अलावा सीपीआई(एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी प्रधानमंत्री से मिलकर आरडीजी बहाल करने की मांग उठाने की इच्छा जताई है।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने भी भाजपा के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया। पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यह समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश हित में आम सहमति बनाने का है।
आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि डॉ. राजेश चानना ने कहा कि सीमित संसाधनों वाले राज्य को केंद्र से वित्तीय सहयोग मिलना चाहिए। वहीं पार्टी के प्रदेश सचिव बलदेव राज ने आरोप लगाया कि आरडीजी बंद करना प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हिमाचल के साथ बड़ा अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगातार आपदाओं से प्रदेश को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है, ऐसे समय में वित्तीय सहायता रोकना प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर चोट होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन प्रदेश के अधिकार स्थायी हैं। राज्य सरकार अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर मंच पर आवाज उठाएगी और जरूरत पड़ी तो केंद्र से औपचारिक मुलाकात कर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।



