➤ दर्जी और उसके सहकर्मी से मारपीट व जुलूस निकालने का आरोप
➤ पुलिस ने कहा, कानून हाथ में लेने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में पुलिस ने हिंदू संघर्ष समिति के दो नेताओं मदन ठाकुर और विजय शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई एक दर्जी और उसके सहकर्मी के साथ कथित मारपीट, दुकान में तोड़फोड़ और सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालने के आरोपों के आधार पर की है। इस कार्रवाई के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
पुलिस के अनुसार, संजौली थाना में अजीम मिर्जा नामक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि संजौली में उसकी दर्जी की दुकान है, जहां आफताब नामक व्यक्ति भी उसके साथ काम करता है। शिकायत के मुताबिक 6 जून 2026 को कुछ लोग उसकी दुकान में पहुंचे और एक युवती को साथ लेकर आए। वहां युवती से पहचान संबंधी सवाल पूछे गए।
शिकायत में कहा गया है कि जब युवती ने अजीम को पहचानने से इनकार कर दिया, तब वहां मौजूद लोगों ने कथित तौर पर अजीम के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की तारें भी तोड़ दी गईं और घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उसे और उसके सहकर्मी आफताब को दुकान से बाहर सड़क तक ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई और नारेबाजी करते हुए सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच चल रही थी। इसी दौरान आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित रूप से जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, कानून को अपने हाथ में लेते हुए दोनों व्यक्तियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें सार्वजनिक रूप से घुमाया गया। जांच के आधार पर पुलिस ने मदन ठाकुर निवासी देवघोड़ी, शिमला और विजय शर्मा निवासी संजौली को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस मामले का संबंध एक अन्य प्रकरण से भी जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, जिस युवती को लेकर विवाद शुरू हुआ था, उसकी शिकायत पर पहले ही महिला थाना शिमला में उबैद नामक युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है। आरोप है कि उसने युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि युवती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में अजीम और आफताब के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया गया था। पुलिस उनकी भूमिका की अलग से जांच कर रही थी। इसी बीच कथित मारपीट और सार्वजनिक जुलूस निकालने की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने अलग कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
मामले को लेकर शिमला में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मामले की जांच जारी है और आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।



