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माता शिकारी देवी मंदिर के कपाट 30 मार्च से खुलेंगे, नवरात्रों में मिलेगा दर्शन का विशेष अवसर

  • माता शिकारी देवी मंदिर 30 मार्च से खुलेगा, नवरात्रों में श्रद्धालुओं को मिलेगा दर्शन का अवसर

  • बर्फ से ढकी वादियों में फिर गूंजेगी श्रद्धालुओं की आस्था, प्रशासन ने की तैयारियां पूरी

  • मंदिर की रहस्यमयी छत और पांडवों की तपस्या से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं फिर चर्चा में


Shikari Devi Temple Opening: हिमाचल प्रदेश के सराज विधानसभा क्षेत्र में स्थित माता शिकारी देवी मंदिर के कपाट 30 मार्च से श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक मंदिर हर साल दिसंबर से मार्च तक बर्फबारी और ठंड के कारण बंद रहता है। इस बार नवरात्रों की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के दर्शन का विशेष अवसर रहेगा।

बर्फ से ढकी पहाड़ियां और प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थान की पवित्रता और आकर्षण को और बढ़ा देंगे। मान्यता है कि माता शिकारी देवी के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता

प्रशासन ने की तैयारियां पूरी

मंदिर को खोलने से पहले प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उपमंडल अधिकारी (नागरिक) थूनाग ने बताया कि मंदिर कमेटी को साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिजली, पानी और रास्तों को सुचारु करने के निर्देश जारी किए गए हैं, जबकि पीडब्ल्यूडी विभाग को बर्फ हटाने का कार्य सौंपा गया है

इससे जंजैहली और करसोग रायगढ़ से मंदिर तक का मार्ग जल्द बहाल होने की उम्मीद है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

मंदिर की अद्भुत मान्यता और पौराणिक रहस्य

इस मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी मान्यता इसे और भी खास बनाती है। कहा जाता है कि मंदिर की छत कभी टिक नहीं पाती। कई बार इसे बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार यह गिर गई। मान्यता है कि माता शिकारी देवी खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती हैं। यह मंदिर शक्ति की देवी दुर्गा को समर्पित है, और इसकी मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है।

इतिहास के अनुसार, महर्षि मार्कंडेय ने यहां कठोर तपस्या की थी। इसके बाद पांडवों ने भी अपने अज्ञातवास के दौरान यहां साधना की। माता दुर्गा ने उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया और इसी दौरान मंदिर का निर्माण हुआ

अब 30 मार्च से श्रद्धालु इन बर्फीली वादियों में माता के दर्शन कर सकेंगे और नवरात्रों के पावन अवसर पर इस दिव्य स्थान की आध्यात्मिक अनुभूति का आनंद उठा सकेंगे