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सरकारी महिला कर्मी ने फर्जी बीपीएल प्रमाणपत्र बनाकर हड़प लिया गरीब का आशियाना , एफआईआर दर्ज


➤ शिमला में महिला सरकारी कर्मी पर फर्जी बीपीएल प्रमाणपत्र से मकान हड़पने का केस
➤ नगर निगम जांच में खुलासा, ढली पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज
➤ गरीबों के लिए बने 90 आवासों में धांधली की शिकायतें बढ़ीं


शिमला: नगर निगम शिमला की विभागीय जांच ने एक बड़ा गड़बड़झाला उजागर किया है। गरीबों के लिए बनाए गए आशियाना-2 प्रोजेक्ट के तहत एक महिला सरकारी कर्मचारी ने फर्जी बीपीएल प्रमाणपत्र लगाकर मकान हासिल कर लिया। मामले के सामने आने के बाद नगर निगम ने ढली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

आरोपी महिला की पहचान संतोष कुमारी के रूप में हुई है। निगम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संतोष कुमारी सरकारी कर्मचारी होते हुए भी खुद को गरीब वर्ग (BPL) दिखाकर मकान आवंटित करवा बैठी। जब नगर निगम ने उससे जवाब मांगा और मकान खाली करने के निर्देश दिए तो उसने इसे मानने से इनकार कर दिया। अंततः निगम ने पुलिस को शिकायत सौंपी और पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नगर निगम के अतिरिक्त एसई-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभियंता धीरज कुमार ने शिकायत में लिखा कि बीपीएल प्रमाणपत्र केवल उन्हीं परिवारों को जारी किया जा सकता है जिनकी सालाना आय 35 हजार से कम हो और जिनके पास न जमीन हो न घर। यह प्रक्रिया पटवारी और तहसीलदार के सत्यापन के बाद ही पूरी होती है। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि नियमों को ताक पर रखकर यह फर्जी प्रमाणपत्र आखिर जारी कैसे हुआ। आने वाले दिनों में पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के आशियाना-2 प्रोजेक्ट के तहत ढली में 90 आवास गरीब परिवारों के लिए बनाए गए थे। वर्ष 2016 से 2020 के बीच इनका आवंटन किया गया था। नियमों के अनुसार, जिन बीपीएल परिवारों के पास जमीन या घर नहीं है, उन्हें यह आवास दिए जाने थे। लेकिन नगर निगम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई रसूखदारों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे ये मकान कब्जा लिए हैं। इसी सिलसिले में विभागीय जांच के दौरान यह बड़ा मामला पकड़ा गया।

मामला अब पुलिस के हाथ में है और माना जा रहा है कि जांच में और भी धांधलियों के खुलासे हो सकते हैं। इससे यह भी साफ हो जाएगा कि गरीबों का हक मारकर आवास पाने वालों की मिलीभगत कितनी गहरी है और इसमें कौन-कौन शामिल हैं।