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21 दिसंबर को शिमला में चलेगा पोलियो सुरक्षा अभियान, 57 हजार से अधिक बच्चों को पिलाई जाएंगी बूंदें

➤ राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण दिवस पर जिलेभर में 743 बूथ होंगे सक्रिय

➤ 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से पिलाई जाएंगी पोलियो ड्रॉप्स

➤ उपायुक्त ने दिए निर्देश, एक भी बच्चा न छूटे


जिला शिमला में 21 दिसंबर 2025  को राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण दिवस के अवसर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान जिले के 57,010 बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की तैयारियों को लेकर उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला टीकाकरण टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई।

उपायुक्त ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत की पोलियो-मुक्त स्थिति को बनाए रखना है। हालांकि देश वर्ष 2014 से पोलियो मुक्त है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में अभी भी इसके मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में सतर्कता बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर को बूथ दिवस होगा, जब सभी तय बूथों पर बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जाएंगी। इसके बाद 22 से 24 दिसंबर तक मॉप-अप राउंड चलेगा, जिसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को टीका लगाएंगे।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला शिमला के प्रवेश द्वारों पर विशेष पोलियो बूथ स्थापित किए जाएंगे। यहां स्थानीय कलाकारों के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, बस स्टैंड और प्रवासी क्षेत्रों को विशेष रूप से टारगेट किया जाए।

उन्होंने कहा कि एक भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए, इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और निर्धारित लक्ष्य को 100 प्रतिशत हासिल किया जाए।

उपायुक्त ने बताया कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को हाइजीन और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें।

जिले में कुल 743 बूथ स्थापित किए जाएंगे, जिनमें प्रमुख रूप से— चिढ़गांव (71), कोटखाई (74), कुमारसैन (42), मशोबरा (138), मतियाना (72), ननखड़ी (33), नेरवा (119), रामपुर (68), सुन्नी (37), टिक्कर (66) और शिमला शहरी (43) शामिल हैं।

पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल, खांसी और छींक के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। गंभीर मामलों में यह स्थायी लकवा या मृत्यु का कारण बन सकता है।

भारत में वर्ष 1970 में हर साल लाखों पोलियो मामले सामने आते थे। वर्ष 2011 में अंतिम मामला दर्ज हुआ और 2014 में भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया गया। हिमाचल प्रदेश में अंतिम मामला 17 अक्टूबर 2009 (सोलन) में सामने आया था।