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शिमला में सफाई कर्मियों की हड़ताल जारी, महापौर ने की काम पर लौटने की अपील

महापौर सुरेंद्र चौहान ने सफाई कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने की अपील की

नगर निगम 10% वेतन बढ़ोतरी को तैयार, लेकिन कर्मचारी आंदोलन जारी

40 सफाई कर्मियों पर कार्रवाई, एसमा के तहत भी हो रही प्रक्रिया


शिमला नगर निगम और सैहब सोसाइटी के सफाई कर्मचारियों के बीच जारी विवाद अब और गहराता जा रहा है। शहर में लगातार बिगड़ती सफाई व्यवस्था के बीच महापौर Surender Chauhan ने एक बार फिर कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर तुरंत काम पर लौटने की अपील की है।

महापौर ने कहा कि नगर निगम कर्मचारियों की मांगों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है और प्रशासन 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी देने के लिए भी तैयार है। इसके बावजूद कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर अड़ा हुआ है और आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था लागू करनी शुरू कर दी है। शहर से कूड़ा उठाने के लिए 20 से 40 अतिरिक्त गाड़ियां लगाई गई हैं और अतिरिक्त लेबर की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े।

महापौर ने यह भी कहा कि कर्मचारियों की मांगों और पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि जल्द समाधान निकाला जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफाई जैसी आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने के कारण प्रशासन एसमा (Essential Services Maintenance Act) के तहत कार्रवाई कर रहा है। इसके साथ ही नगर निगम इस मामले को अदालत में भी ले जाने की तैयारी कर रहा है।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था और जनता की सुविधा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। इसी के तहत अब तक 40 सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

गौरतलब है कि शिमला शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा सैहब सोसाइटी के करीब 800 कर्मचारियों पर है। ये कर्मचारी पिछले सात दिनों से 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

हालांकि नगर निगम प्रशासन की ओर से AGM की बैठक बुलाकर कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी का आश्वासन दिया गया है, लेकिन फिलहाल सफाई कर्मचारी आंदोलन खत्म करने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। लगातार बढ़ते विवाद के बीच शहर की सफाई व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।