➤ 5 सितंबर को अचानक बंद हुआ मोबाइल सिम,कॉल और मैसेज भी हुए बंद
➤ 33 अनधिकृत UPI ट्रांजेक्शन से खाते से निकले 11.04 लाख रुपये
➤ पुलिस को सिम क्लोनिंग का शक, रकम किन खातों में गई इसकी जांच जारी
शिमला के चिड़गांव क्षेत्र में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसने मोबाइल सिम और बैंक खाते की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक बुजुर्ग के बैंक खाते से 5 से 18 सितंबर 2026 के बीच 33 अनधिकृत UPI ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 11,04,799.61 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम से पहले 5 सितंबर को उनका मोबाइल सिम अचानक काम करना बंद हो गया था। इसके बाद उनके फोन पर न तो कॉल आ रही थी और न ही कोई संदेश प्राप्त हो रहा था। जब उन्होंने बैंक खाते की जानकारी हासिल की तो पता चला कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सिम बंद होने तथा अनधिकृत लेन-देन के बीच संबंध की भी पड़ताल की जा रही है।
सिम अचानक बंद हुआ और खाते से निकलती रही रकम
पीड़ित चिड़गांव क्षेत्र के स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं। उनका खाता यूको बैंक चिड़गांव में है। शिकायत के अनुसार, 5 सितंबर को अचानक उनका मोबाइल सिम काम करना बंद हो गया। सामान्य तौर पर सिम बंद होने के बाद मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी सेवाओं में परेशानी महसूस होती है, लेकिन इस मामले में इसके बाद बैंक खाते से अनधिकृत लेन-देन सामने आए।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने स्वयं इनमें से कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं किया था। उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को भी अपने बैंक खाते से रकम निकालने या ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद 5 से 18 सितंबर के बीच लगातार 33 UPI ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से रकम निकलती रही।
जब बैंक से खाते की जानकारी ली गई तो अनधिकृत लेन-देन का पता चला। कुल 11,04,799.61 रुपये की राशि अलग-अलग अज्ञात बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई।
न कॉल आई, न मैसेज मिला
इस मामले का एक अहम पहलू यह है कि पीड़ित के मुताबिक, सिम बंद होने के बाद उनके मोबाइल पर न तो सामान्य कॉल आ रही थी और न ही संदेश प्राप्त हो रहे थे। ऐसे में बैंक खाते से हुए लेन-देन की जानकारी उन्हें समय रहते मोबाइल पर नहीं मिल सकी।
साइबर अपराधों में मोबाइल नंबर से जुड़ी सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े कई सुरक्षा संदेश मोबाइल नंबर पर आते हैं। ऐसे में मोबाइल सिम का अचानक निष्क्रिय होना किसी भी व्यक्ति के लिए सतर्क होने का संकेत हो सकता है, खासकर तब जब वह बिना किसी स्पष्ट कारण के हुआ हो।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने बुजुर्ग की शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खाते से निकाली गई रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और पूरे मामले को किस तरीके से अंजाम दिया गया।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह के अनुसार, पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद अनधिकृत UPI लेन-देन और मोबाइल सिम बंद होने की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां लेन-देन से जुड़े खातों और घटनाक्रम के अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही हैं।
सिम क्लोनिंग का भी शक
पुलिस को इस मामले में सिम क्लोनिंग की आशंका है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले ठगी के तरीके को अंतिम रूप से निर्धारित नहीं माना जा सकता। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि पीड़ित का सिम अचानक बंद क्यों हुआ और उसी अवधि के आसपास बैंक खाते से अनधिकृत लेन-देन कैसे हुए।
सिम से जुड़ी धोखाधड़ी में अपराधी मोबाइल नंबर से संबंधित सेवाओं पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में वास्तविक ग्राहक को नेटवर्क संबंधी परेशानी हो सकती है। इसके बाद बैंकिंग या अन्य ऑनलाइन खातों को निशाना बनाए जाने का जोखिम बढ़ सकता है।
सिम बंद हो तो इसे नजरअंदाज न करें
मोबाइल सिम का अचानक बंद हो जाना हमेशा साइबर ठगी का संकेत नहीं होता। नेटवर्क समस्या, तकनीकी खराबी या टेलीकॉम से जुड़ी अन्य वजहें भी हो सकती हैं। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के सिम अचानक काम करना बंद कर दे और साथ ही कॉल या SMS भी पूरी तरह बंद हो जाएं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में संबंधित मोबाइल नेटवर्क कंपनी से तुरंत संपर्क कर सिम और नंबर की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। साथ ही बैंक खाते और UPI से जुड़े लेन-देन की जांच करना भी जरूरी है। किसी अनधिकृत गतिविधि की जानकारी मिलने पर बैंक को तत्काल सूचना देकर संबंधित डिजिटल भुगतान सेवाओं को सुरक्षित करने के कदम उठाने चाहिए।
बैंक खाते के साथ निजी डाटा पर भी खतरा
सिम या मोबाइल नंबर से जुड़ी सुरक्षा में सेंध का असर केवल बैंक खाते तक सीमित नहीं हो सकता। मोबाइल नंबर कई ऑनलाइन सेवाओं, ईमेल, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल अकाउंट से जुड़ा होता है। यदि किसी अपराधी को किसी नंबर या खाते पर अनधिकृत नियंत्रण मिल जाए तो वह दूसरे डिजिटल खातों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है।
इसी वजह से मोबाइल नंबर से जुड़ी किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लेना जरूरी है। बैंकिंग ऐप, UPI और दूसरे डिजिटल अकाउंट में समय-समय पर लेन-देन और सुरक्षा गतिविधियों की जांच करना भी उपयोगी है।
33 ट्रांजेक्शन के बाद अब रकम की तलाश
चिड़गांव के इस मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि 11.04 लाख रुपये की रकम आखिर किन खातों में पहुंची। 33 अलग-अलग अनधिकृत UPI लेन-देन के जरिए रकम ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। जांच में इन ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़ने और रकम के प्रवाह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस यह भी जांच रही है कि मोबाइल सिम के बंद होने और बैंक खाते से रकम निकलने के बीच क्या सीधा संबंध है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साइबर अपराधियों ने किस तरीके से खाते को निशाना बनाया।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि मोबाइल सिम, बैंकिंग और UPI सुरक्षा आपस में कितने जुड़े हुए हैं। किसी भी व्यक्ति का सिम अचानक बंद हो जाए और साथ ही कॉल तथा SMS भी आना बंद हो जाएं, तो उसे तुरंत स्थिति की जांच करनी चाहिए। समय रहते बैंक और टेलीकॉम कंपनी को सूचना देने से संभावित नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।



