➤ शिमला में जिला परिषद सदस्यों के शपथ समारोह के दौरान जमकर हंगामा हुआ
➤ डीसी शिमला के खिलाफ भाजपा समर्थकों ने लगाए मुर्दाबाद के नारे, धक्का-मुक्की भी हुई
➤ विवाद के बाद जिला परिषद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव टल गया
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जिला परिषद सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शुक्रवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। शपथ समारोह के बीच हुए हंगामे के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया और आखिरकार जिला परिषद चेयरमैन एवं वाइस चेयरमैन के चुनाव को टालना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, शिमला के बचत भवन में जिला परिषद सदस्यों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान डीसी शिमला अनुपम कश्यप द्वारा जिला परिषद सदस्यों के परिजनों और समर्थकों को हॉल से बाहर जाने के निर्देश दिए गए। इस कार्रवाई के बाद भाजपा समर्थक नाराज हो गए और कार्यक्रम स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

भाजपा समर्थकों और नेताओं ने “डीसी शिमला मुर्दाबाद” के नारे लगाए। देखते ही देखते माहौल और अधिक गरमा गया। बचत भवन के बाहर भाजपा समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की, जबकि अंदर जिला परिषद सदस्यों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम जारी रहा।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब मीडिया कर्मियों को भी शपथ ग्रहण समारोह शुरू होने से पहले हॉल से बाहर जाने के लिए कहा गया। भाजपा नेताओं ने इस कदम पर भी आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने के बाद जब डीसी शिमला अपने कार्यालय लौटने लगे तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने फिर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति को देखते हुए क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) और पुलिस बल को सक्रिय किया गया। पुलिस ने डीसी को सुरक्षा घेरे में उनके कार्यालय तक पहुंचाया।
इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई। भाजपा नेत्री शशि बाला की बाजू में चोट लगने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिला परिषद शपथ ग्रहण समारोह के दौरान इस तरह की स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के फैसलों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
हर्ष महाजन ने दावा किया कि जिला परिषद चेयरमैन चुनाव के लिए भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत मौजूद है, लेकिन सरकार पंचायती राज संस्थाओं पर भरोसा नहीं कर रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पंचायत चुनावों को टालने का प्रयास किया गया, फिर रोस्टर संबंधी अधिकार डीसी को दिए गए और अब चेयरमैन चुनाव की समय सीमा समाप्त होने दी गई।
इस घटनाक्रम के बाद जिला परिषद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्मा गया है। अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।



