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PDS गेहूं की गुणवत्ता पर राज्य खाद्य आयोग का बड़ा फैसला, जानें

राज्य खाद्य आयोग की बैठक में PDS के तहत गेहूं और आटे की गुणवत्ता पर बड़ा फैसला
FCI गोदामों से निम्न गुणवत्ता और संक्रमित गेहूं अस्वीकार करने के निर्देश
फोर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और जिलावार रिपोर्टिंग पर भी विस्तृत चर्चा



राज्य खाद्य आयोग की बुधवार को आयोजित अहम बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गेहूं और गेहूं के आटे की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, फोर्टिफिकेशन और वितरण से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में आम जनता तक गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पहुंचाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. एसपी कत्याल ने की। इसमें शिमला, बिलासपुर, सिरमौर और मंडी जिलों के आटा मिल मालिकों ने भाग लिया। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एफसीआई गोदामों से मिलने वाले निम्न गुणवत्ता वाले या संक्रमित गेहूं को सीधे अस्वीकार किया जाए। इस फैसले को राशन उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।

आयोग ने यह भी निर्णय लिया कि सभी मिलर्स अपने-अपने जिलों के नियंत्रकों को खरीद और मिलिंग की समय-सीमा संबंधी जिलावार रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करेंगे। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

बैठक में फोर्टिफिकेशन प्रीमिक्स के सटीक मिश्रण को लेकर भी चर्चा हुई। आयोग ने आटा मिलों को माइक्रो-फीडर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि पोषक तत्वों का सही अनुपात बनाए रखा जा सके। यह कदम लोगों तक बेहतर पोषणयुक्त आटा पहुंचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा पैकेजिंग से जुड़े कई मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैग की शेल्फ लाइफ, लेमिनेशन और नमी के उतार-चढ़ाव को लेकर मिलर्स ने अपनी चिंताएं रखीं। उन्होंने मांग की कि वजन में होने वाले मामूली अंतर के लिए अनुमेय सहनशीलता सीमा तय की जाए, ताकि व्यावहारिक स्तर पर आने वाली समस्याओं का समाधान हो सके।

इस बैठक के जरिए राज्य खाद्य आयोग ने साफ संकेत दिया है कि PDS के तहत वितरित होने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।