➤ सुक्खू बोले- किशाऊ परियोजना के लिए केंद्र से अकेले लड़ी लड़ाई, हिमाचल को मिलेगा आर्थिक लाभ
➤ अनुराग ठाकुर से कहा- 20 साल सांसद रहे, बताएं हमीरपुर के लिए क्या किया
➤ सानन प्रोजेक्ट, डॉक्टरों की भर्ती और गरीब परिवारों के लिए नई योजनाओं पर भी बोले सीएम
हमीरपुर। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर दौरे के दौरान किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुराग ठाकुर को किशाऊ परियोजना के संबंध में अपने ज्ञान में वृद्धि करनी चाहिए और प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल के हितों को लेकर किए गए प्रयासों को समझना चाहिए। सुक्खू ने यह भी कहा कि अनुराग ठाकुर करीब 20 साल से हमीरपुर के सांसद हैं और उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने हमीरपुर की जनता के लिए क्या काम किया है।
किशाऊ परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री के इन बयानों के बीच राजनीतिक बहस भी तेज है। इससे एक दिन पहले अनुराग ठाकुर ने कहा था कि छह राज्यों के बीच हुआ समझौता केंद्र सरकार के नेतृत्व में बातचीत और सहमति से संभव हुआ और इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए।
‘परवाणू से आगे नहीं खुलती भाजपा नेताओं की जुबान’
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल के हितों को केंद्र के सामने उठाने की बात आती है तो भाजपा नेताओं की जुबान परवाणू से आगे नहीं जाती। इसी तरह का बयान मुख्यमंत्री ने अगस्त में भी दिया था, जब उन्होंने कहा था कि भाजपा के प्रदेश नेता केंद्र के सामने हिमाचल के हितों की मजबूती से पैरवी नहीं करते।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है। भाजपा नेताओं की ओर से इस पर अलग-अलग मौकों पर केंद्र के माध्यम से हिमाचल को मिलने वाली मदद और परियोजनाओं को लेकर अपने दावे रखे जाते रहे हैं।
किशाऊ परियोजना पर क्या बोले सुक्खू
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के लिए उन्होंने केंद्र के समक्ष हिमाचल के हितों को लेकर अपना पक्ष रखा और राज्य पर परियोजना के वित्तीय बोझ को लेकर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, समझौते के बाद हिमाचल को परियोजना से आर्थिक लाभ मिलेगा और राज्य को बिजली की हिस्सेदारी भी प्राप्त होगी।
15 सितंबर 2026 को हिमाचल समेत छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है और इसके करीब 90 प्रतिशत वित्तीय बोझ को केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों को वहन करना होगा। परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल-उत्तराखंड सीमा के पास प्रस्तावित है।
द ट्रिब्यून के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा है कि परियोजना के चालू होने के बाद हिमाचल को करीब 1,200 करोड़ रुपये सालाना मिलने की उम्मीद है और राज्य को 211 मेगावाट बिजली मिलेगी, जिसकी उत्पादन लागत हिमाचल को नहीं उठानी होगी।
वहीं, अनुराग ठाकुर ने परियोजना को लेकर केंद्र की भूमिका को प्रमुख बताते हुए कहा है कि छह राज्यों के बीच सहमति केंद्र की बातचीत के जरिए बनी। उन्होंने परियोजना को करीब छह दशक से लंबित मुद्दे के समाधान के रूप में बताया है।
‘अगर जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री होते तो हिमाचल पर पड़ता वित्तीय बोझ’
सुक्खू ने कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार होती तो किशाऊ परियोजना के लिए हिमाचल को बड़ा वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में हिमाचल के हिस्से के वित्तीय दायित्व को कम किया गया है।
इस परियोजना को लेकर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हिमाचल के बिजली घटक से जुड़े वित्तीय बोझ को लेकर जून में केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी थी। इसके बाद सितंबर में छह राज्यों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
सानन हाइड्रो प्रोजेक्ट पर भी बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने सानन हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर कहा कि यह फिलहाल पंजाब सरकार के अधीन है, लेकिन हिमाचल सरकार इस परियोजना पर अपने अधिकार के लिए प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों से जुड़े मामलों को सरकार कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाएगी।
सुक्खू ने विपक्ष द्वारा वकीलों की फीस को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई के लिए देश के बड़े वकीलों की सेवाएं ली गई हैं और यदि इससे प्रदेश के लंबित वित्तीय हितों को हासिल करने में मदद मिलती है तो सरकार इसे जरूरी खर्च मानती है।
हमीरपुर में मेडिकल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने हमीरपुर के कंडोरला में उत्तर भारत का पहला एलाइड सर्विसेज मेडिकल कॉलेज शुरू करने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों की भर्ती जल्द किए जाने की जानकारी भी दी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भर्ती को लेकर राज्य सरकार पहले ही कई पदों को मंजूरी दे चुकी है। जून 2026 में हिमाचल मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग में 300 चिकित्सा अधिकारियों, 200 स्टाफ नर्सों और 162 तकनीकी पदों सहित कई पदों पर भर्ती को मंजूरी दी थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। उनके अनुसार आने वाले समय में 3 टेस्ला MRI मशीन जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने और लैब सुविधाओं को बेहतर करने पर काम किया जा रहा है।
टांडा में GNM की जगह BSc नर्सिंग शुरू करने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में GNM को बंद करके BSc नर्सिंग शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र प्रमुख हैं।
उन्होंने दावा किया कि जब उनकी सरकार ने सत्ता संभाली थी, उस समय मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की ऑक्युपेंसी करीब 35 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर करीब 60 प्रतिशत किया गया है।
अक्टूबर में दो नई योजनाएं लाने का दावा
मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में दो नई योजनाएं शुरू किए जाने की भी जानकारी दी। उनके अनुसार इन योजनाओं से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले करीब दो लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन परिवारों की बेटियों को हर महीने 1,500 रुपये, परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता और 10 लाख रुपये तक का बीमा उपलब्ध कराने की योजना है।
इन घोषणाओं के वास्तविक लाभ, पात्रता और क्रियान्वयन की विस्तृत शर्तें सरकार की आधिकारिक अधिसूचना और योजना के दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होंगी।



