➤ रूलहेड का मलह माता सुकराला मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना अनोखा देवस्थल
➤ 400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ा मंदिर, 2022 में पूरा हुआ भव्य निर्माण
➤ आस्था के साथ प्राकृतिक सौंदर्य, बोह घाटी का झरना बना आकर्षण
धर्मशाला: देवभूमि हिमाचल के पावन धार्मिक स्थलों की श्रृंखला में मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, गहरी आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के कारण तेजी से विशेष पहचान बना रहा है। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव बोह के समीप रूलहेड में स्थित यह भव्य मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक उभरता हुआ आकर्षण बन चुका है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दक्षिण भारतीय शैली की वास्तुकला है, जो इसे हिमाचल के पारंपरिक मंदिरों से अलग बनाती है। बारीक नक्काशी, सुंदर शिल्पकला और भव्य स्थापत्य शैली श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।
मंदिर की आस्था करीब 400 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि गौतम ब्राह्मण वंश के पूर्वज जम्मू के विरावल स्थित माता के प्राचीन मंदिर से माता सुकराला जी का त्रिशूल लेकर बोह पहुंचे थे। उनका उद्देश्य गांव में मंदिर की स्थापना करना था, लेकिन उस समय यह संकल्प पूरा नहीं हो पाया।
समय बीतने के साथ इस वंश के पृथ्वीराज शर्मा ने मंदिर निर्माण की पहल की। बाद में उनके पुत्र प्रकाश चंद शर्मा और विजय शर्मा ने स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से इस संकल्प को साकार रूप दिया। लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2022 में इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।
मंदिर की भव्यता में इसकी कलात्मक शिल्पकारी का भी बड़ा योगदान है। मंदिर की नक्काशी और शिल्प निर्माण का कार्य उड़ीसा के कुशल कारीगरों ने किया है, जबकि निर्माण में प्रयुक्त पत्थर हिमाचल के चंबा से लाए गए हैं। इसी कारण मंदिर का स्वरूप दक्षिण भारतीय मंदिरों की झलक प्रस्तुत करता है, जो यहां आने वाले हर व्यक्ति को आकर्षित करता है।
माता सुकराला जी की महिमा से जुड़ी एक चमत्कारिक कथा भी भक्तों के बीच प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, एक बार चंबा के राजा माता के जम्मू स्थित मंदिर में पहुंचे और उन्होंने माता की शक्ति पर प्रश्न उठाया। उसी समय मंदिर परिसर के पास खड़ा सूखा लसूड़े का पेड़ अचानक हरा-भरा हो गया। इस चमत्कार के बाद माता की महिमा दूर-दूर तक फैल गई।
वर्तमान में मंदिर में माता सुकराला जी (लक्ष्मी स्वरूप), माता काली जी और माता सरस्वती जी की पवित्र पिंडियां विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां आकर तीनों स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर के समीप स्थित बोह घाटी का प्राकृतिक झरना इस स्थान की सुंदरता को और भी दिव्य बना देता है। शांत पहाड़ी वातावरण, हरियाली और झरने की मधुर ध्वनि यहां आने वाले लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। यही कारण है कि यह स्थल अब आस्था के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से उभर रहा है।
आस्था, स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य का यह अद्भुत संगम मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर को आने वाले समय में कांगड़ा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल कर सकता है।



