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हिमाचल: तीन साल पुलिस में कांस्टेबल रहे विकास, अब पहनेंगे सेना की अफसर वाली वर्दी; CDS पास कर बने लेफ्टिनेंट

तीन साल हिमाचल पुलिस में कांस्टेबल रहे विकास गुलेरिया, अब सेना में बने लेफ्टिनेंट

सितंबर 2024 में CDS परीक्षा पास कर ओटीए चेन्नई से हासिल किया स्थायी कमीशन

बिना सैन्य पृष्ठभूमि के सामान्य परिवार से निकले विकास ने मेहनत और अनुशासन से रचा इतिहास


कांगड़ा। कभी हिमाचल पुलिस की वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले फतेहपुर के पट्टा जाटियां निवासी विकास गुलेरिया अब भारतीय सेना की अफसर वाली वर्दी पहनेंगे। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले विकास ने अपनी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने उनके परिवार के साथ पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

5 सितंबर 2026 विकास के जीवन का वह खास दिन रहा, जब वह ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई से पास आउट हुए और भारतीय सेना में स्थायी कमीशन के साथ लेफ्टिनेंट बने। पुलिस कांस्टेबल से सेना के अधिकारी तक का उनका सफर आसान नहीं था। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच सेना में अधिकारी बनने का सपना देखना और फिर उसे पूरा करने के लिए लगातार तैयारी करना विकास की कहानी को खास बनाता है।

कांस्टेबल की नौकरी के साथ देखा सेना में अफसर बनने का सपना

विकास गुलेरिया ने 2022 से 2025 तक हिमाचल पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवाएं दीं। पुलिस की नौकरी के दौरान ड्यूटी की जिम्मेदारियां और काम का दबाव उनके सामने था, लेकिन उनके मन में भारतीय सेना में अधिकारी बनने की इच्छा लगातार बनी रही।

उन्होंने नौकरी के साथ ही अपनी तैयारी जारी रखी। मेहनत का परिणाम सितंबर 2024 में सामने आया, जब विकास ने CDS यानी Combined Defence Services परीक्षा पास कर ली। इसके बाद चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका अगला पड़ाव ओटीए चेन्नई बना।

ओटीए चेन्नई में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विकास ने 5 सितंबर को पासिंग आउट परेड में अधिकारी के रूप में कदम बढ़ाया। कुछ साल पहले तक पुलिस कांस्टेबल के रूप में ड्यूटी करने वाला यही युवा अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है।

पढ़ाई में भी शुरू से रहे अव्वल

विकास की सफलता केवल प्रतियोगी परीक्षा तक सीमित नहीं है। वह पढ़ाई में भी शुरू से ही अच्छे रहे हैं। उन्होंने 2017 में कॉन्वेंट मेंसा स्कूल देहरी से सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा 10 CGPA के साथ पास की।

इसके बाद उन्होंने पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजा का तालाब से नॉन मेडिकल में जमा दो की पढ़ाई पूरी की और 90 प्रतिशत अंक हासिल किए। वर्ष 2022 में उन्होंने वजीर राम सिंह राजकीय महाविद्यालय देहरी से बीएससी की डिग्री 80 प्रतिशत अंकों के साथ पूरी की।

पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के बाद नौकरी हासिल करना और फिर नौकरी के साथ CDS की तैयारी कर सेना में अधिकारी बनना बताता है कि विकास ने अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत की।

परिवार में कोई सैनिक पृष्ठभूमि नहीं

विकास गुलेरिया की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके परिवार की कोई सैनिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। उनके पिता विभीषण सिंह निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं, जबकि मां मीनू गृहिणी हैं।

सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय सेना में अधिकारी बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। खासकर तब, जब विकास ने पहले पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवा दी और उसके बाद देश की प्रतिष्ठित CDS परीक्षा के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने का रास्ता चुना।

विकास ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, चचेरे भाई आंचल गुलेरिया, अध्यापकों और अपनी कड़ी मेहनत को दिया है। परिवार में उनकी छोटी बहन दीक्षा गुलेरिया बॉटनी में एमएससी की पढ़ाई कर रही हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी विकास की कहानी

विकास गुलेरिया की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या किसी अन्य चुनौती के कारण अपने बड़े लक्ष्य को पीछे छोड़ देते हैं। विकास ने पहले पुलिस में नौकरी की, लेकिन अपने मन में सेना में अधिकारी बनने का सपना जिंदा रखा।

उन्होंने नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी और CDS परीक्षा पास कर अपने लक्ष्य की दिशा में निर्णायक कदम उठाया। इसके बाद सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर अब वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में देश सेवा की नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

पुलिस कांस्टेबल से सेना के लेफ्टिनेंट तक का यह सफर केवल पद बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दृढ़ संकल्प, अनुशासन और लगातार प्रयास की मिसाल है। विकास ने साबित किया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए लगातार मेहनत की जाए तो सामान्य परिस्थितियों से निकलकर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।