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शिमला नगर निगम में वोट चोरी का आरोप, पूर्व पार्षद बोले—संविधान की हत्या हुई

वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर पूर्व पार्षद विवेक शर्मा का कांग्रेस पर तीखा हमला
नगर निगम चुनाव में एक ही व्यक्ति का नाम दो वार्डों में दर्ज पाया गया
विवेक शर्मा ने कहा—नगर निगम शिमला का गठन संविधान की अवहेलना पर आधारित




शिमला। नगर निगम शिमला के पूर्व पार्षद एवं अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए नगर निगम चुनावों में वोटर लिस्ट में की गई गड़बड़ी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2023 के नगर निगम चुनावों में कांग्रेस द्वारा वोट चोरी के लगाए गए आरोप झूठे, तथ्यहीन और भ्रामक हैं।
विवेक शर्मा ने बताया कि सितंबर 2025 में हुई नगर निगम की हाउस बैठक के दौरान मझाठ और टूटू वार्ड के पार्षदों के बीच हुए विवाद ने यह बड़ा खुलासा किया कि संविधान की सीधी अवहेलना करते हुए वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की गई है।

उन्होंने कहा कि मझाठ वार्ड की पार्षद ने अपने फेसबुक पेज ‘मझाठ’ पर वोटर लिस्ट साझा की, जिसमें टूटू वार्ड की पार्षद मोनिका भारद्वाज का नाम मझाठ वार्ड की वोटर लिस्ट में दर्ज पाया गया है। इतना ही नहीं, उनका नाम सप्लीमेंट्री लिस्ट में भी दोबारा शामिल किया गया, जबकि टूटू वार्ड की वोटर लिस्ट में भी उनका नाम दर्ज है और उन्होंने वहीं से नामांकन दाखिल किया था।

विवेक शर्मा ने कहा कि नगर निगम चुनाव नियमों के रूल 16, सब-क्लॉज 2 के अनुसार किसी व्यक्ति का नाम एक ही वार्ड की वोटर लिस्ट में दर्ज होना चाहिए। ऐसे में एक व्यक्ति का नाम दो वार्डों में दर्ज होना चुनावी नियमों और संविधान दोनों की अवहेलना है।
उन्होंने इसे नगर निगम शिमला के गठन की वैधता पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया और कहा कि वर्तमान सरकार ने जानबूझकर चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर गलत वोटर लिस्ट के आधार पर निगम का गठन कराया है।

पूर्व पार्षद ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी के लिए वोटर लिस्ट में हेराफेरी और वोट चोरी कोई नई बात नहीं, बल्कि यह उनकी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पार्षद ने स्वयं यह स्वीकार कर लिया है कि वोट चोरी कांग्रेस की पहचान बन चुकी है।
उन्होंने मांग की कि वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो नगर निगम शिमला को तत्काल भंग किया जाए।