➤ राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा जॉइन की
➤ 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के साथ आने का दावा
➤ ED छापे के बाद मित्तल का फैसला, AAP को बड़ा झटका
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा भूचाल देखने को मिला, जब राज्यसभा सांसद Raghav Chadha, Sandeep Pathak और Ashok Kumar Mittal ने भाजपा का दामन थाम लिया। तीनों नेताओं को भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
इस दौरान राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसद उनके साथ भाजपा में शामिल होने का निर्णय ले चुके हैं, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।
कौन-कौन हैं साथ आने वाले सांसद?
राघव चड्ढा के मुताबिक, उनके साथ आने वालों में हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। हालांकि इनमें से कुछ नेताओं ने अभी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
वहीं Swati Maliwal ने कहा कि वह फिलहाल इटानगर में हैं और दिल्ली लौटकर इस पर बयान देंगी।
“गलत पार्टी में सही आदमी था” — राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि
“पिछले कुछ वर्षों से मुझे लग रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि लंबे समय से चल रही राजनीतिक और वैचारिक असहमति का परिणाम है।
दलबदल कानून पर क्या बोले?
राघव ने साफ किया कि
यह कदम दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएगा, क्योंकि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने मिलकर यह निर्णय लिया है।
अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह AAP के लिए संसदीय स्तर पर सबसे बड़ा झटका साबित हो सकता है।
ED छापे के बाद मित्तल का बड़ा कदम
इस पूरे घटनाक्रम में अशोक कुमार मित्तल की एंट्री सबसे ज्यादा चर्चा में है।
15 अप्रैल को उनके जालंधर स्थित आवास पर ED ने छापा मारा था और महज 10 दिन बाद उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली।
राजनीतिक गलियारों में इस टाइमिंग को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
क्या पहले से थे अलगाव के संकेत?
राघव चड्ढा के इस फैसले के संकेत पिछले दो साल से दिख रहे थे:
- 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी पर चुप्पी
- 2025 दिल्ली चुनाव हार के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं
- पार्टी कार्यक्रमों से दूरी
- सोशल मीडिया से AAP की पहचान हटाना
- संसद में पार्टी लाइन से अलग रुख
इन सभी घटनाओं ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि राघव और AAP के बीच दूरी बढ़ रही है।
2027 पंजाब चुनाव पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।
अगर 7 सांसदों का दावा सही साबित होता है, तो यह AAP की संगठनात्मक और राजनीतिक ताकत पर सीधा असर डालेगा।



