लांस नायक चंद्रशेखर हरबोला, जो 1971 में कुमाऊं रेजीमेंट में शामिल हुए थे, सियाचिन ग्लेशियर पर पांच सदस्यीय गश्ती दल का हिस्सा थे, जब मई 1984 में हिमस्खलन हुआ था. शनिवार को उनके कंकाल के अवशेष मिले थे. लांस नायक चंद्रशेखर हरबोला, सैनिक जिसका शव सियाचिन ग्लेशियर पर लापता होने के 38 साल बाद बंकर में मिला था, उसका बुधवार को उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और महिला अधिकारिता मंत्री रेखा आर्य ने उनकी 63 वर्षीय पत्नी शांति देवी से मुलाकात कर शोक व्यक्त किया और अंतिम संस्कार से पहले सैनिक को श्रद्धांजलि दी. धामी ने कहा कि लोग चंद्रशेखर के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेंगे. “देश के लिए बलिदान देने वाले उत्तराखंड के सैनिकों की याद में सैनिक धाम की स्थापना की जा रही है. शहीद चंद्रशेखर की यादें भी सैनिक धाम में संजो कर रखी जाएंगी.
बुधवार को जैसे ही लांस नायक हरबोला का पार्थिव शरीर घर लाया गया, पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठा. उनके परिवार और अन्य लोगों ने अपना अंतिम सम्मान देने के बाद, लांस नायक हरबोला के नश्वर अवशेषों को चित्रशिला घाट, रानीबाग में दाह संस्कार के लिए ले जाया गया.
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