➤मानसून आपदा, मेडिकल यूनिवर्सिटी व कॉलेज शिफ्टिंग पर BJP का सरकार को घेरने का प्लान
➤नगरपालिका संशोधन अध्यादेश से दो साल तक टल सकते हैं नए निकाय चुनाव
➤कृषि-बागवानी विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति से जुड़ा नया विधेयक पेश होगा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हुआ और पहले ही दिन माहौल गरमाने के आसार साफ हो गए हैं। विपक्ष भारतीय जनता पार्टी ने सत्तापक्ष को घेरने की पूरी रणनीति बीती शाम शिमला में आयोजित विधायक दल की बैठक में बना ली है। भाजपा ने तय किया है कि प्राकृतिक आपदा, नेरचौक अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी और थुनाग हॉर्टिकल्चर कॉलेज को शिफ्ट करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर किया जाएगा। विपक्ष इन मामलों को लेकर काम रोको प्रस्ताव तक ला सकता है।

सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सभी दलों की बैठक ली और सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की उम्मीदों के अनुरूप चर्चा और संवाद के जरिए समाधान खोजा जाना चाहिए।
सत्र की कार्यवाही की शुरुआत पूर्व भाजपा विधायक गणेश दत्त भरवाल को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत कई नेताओं ने शोकोद्गार के माध्यम से उन्हें याद किया।

आज ही शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह “हिमाचल प्रदेश नगरपालिका संशोधन अध्यादेश-2025” सदन में पेश करेंगे। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद राज्य के नए गठित नगर निकायों में चुनाव अगले दो साल तक टाले जा सकेंगे। जबकि चुनाव आयोग पहले से ही चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे चुका है। यह कदम सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नई राजनीतिक बहस को जन्म देगा।
कृषि मंत्री चंद्र कुमार आज कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति से संबंधित नया संशोधन विधेयक पेश करेंगे। इसके साथ ही वर्ष 2024 का पुराना विधेयक वापस ले लिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सत्तापक्ष के चार विधायक— चंद्र शेखर, केवल सिंह पठानिया, सुरेश कुमार और नीरज नैय्यर— मानसून आपदा से हुए नुकसान पर चर्चा की मांग करेंगे। सरकार खुद भी इस विषय को लेकर प्रस्ताव लाने जा रही है।
सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही आपदा राहत, शिक्षा संस्थानों के स्थानांतरण, और प्रशासनिक फैसलों पर तीखी बहस कर सकते हैं। विधानसभा सचिवालय को अब तक 981 प्रश्न मिल चुके हैं, जिनमें 793 तारांकित और 188 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा 32 मुद्दों को अलग-अलग नियमों के तहत चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
यानी साफ है कि इस बार का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों और सियासी टकराव का गवाह बनने जा रहा है।



