प्रदेश के बाहर से आ रहे हिमाचल वासियों को इंस्टिट्यूशनल क्वारंटाइन और टेस्टिंग करने का फैसला भले से ही लिया गया लेकिन ये सही कदम है। यदि सरकार ने सही समय पर ऐसे फैसले लिए होते तो आज जनता को संक्रमण के ख़तरे से बचाया जा सकता था। ऐसा लगता है कि जैसे मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द ऐसी लांबी है जो उन्हें फ़ेल करना चाहती है। ये बात प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रेम क़ौशल न कही।
प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारियों को कोरोना फंड से फ़ोन उपलब्ध करवाना, 50 रुपए कीमत के सैनेटाइजर की 150 रुपए में खरीद, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का तबादला, बाहर से आने वाले लोगों को लेकर सरकार की कोई योजना न होना और सीमेंट और पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी इत्यादि ऐसे कदम हैं जिनसे आभास होता है कि प्रदेश में एक राजनीतिक सरकार सत्ता में नहीं है।
आज जब संकट की घड़ी में एक कल्याणकारी सरकार होने का एहसास जनता को होना चाहिए यह सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक कर जनविरोधी निर्णय ले रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया कि नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री द्वारा उनको लिखे गए पत्र में उठाये गए मुद्दों का संज्ञान लेते हुए वह उचित कार्यवाही करें।



