➤ अमेरिका-इजराइल हमले में खामेनेई की मौत का दावा, IRGC चीफ भी मारे गए
➤ ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहीदी बने नए IRGC कमांडर-इन-चीफ
➤ ईरान की चेतावनी- थोड़ी देर में होगा सबसे खतरनाक पलटवार
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच हालात और विस्फोटक हो गए हैं। अमेरिका-इजराइल के एहतियाती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत का दावा किया गया है। ईरानी मीडिया एजेंसियों Tasnim News Agency और Fars News Agency ने इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, बहू और पोती की भी मौत हुई है। ईरान सरकार ने 40 दिनों के राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की है।

इसी हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ की भी मौत की खबर है। इसके बाद ईरान ने तुरंत बड़ा फैसला लेते हुए ब्रिगेडियर जनरल Ahmad Vahidi को नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त कर दिया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं और ईरान ने बड़े पलटवार की चेतावनी दी है।
IRGC ने बयान जारी कर कहा कि देश ने अपने सर्वोच्च नेता और सैन्य नेतृत्व को खो दिया है, लेकिन जवाब जरूर दिया जाएगा। ईरानी सेना ने ऐलान किया है कि “सबसे खतरनाक अभियान” कुछ ही देर में शुरू होगा और अमेरिकी ठिकानों व कब्जे वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया जाएगा।

इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत का दावा किया था। उन्होंने इसे दुनिया के लिए न्याय बताया।
शनिवार को इजराइल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी Tehran समेत कई शहरों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने Tel Aviv सहित मिडिल ईस्ट के नौ देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागे जाने का दावा है।
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 740 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत और 45 के घायल होने की खबर ने हालात को और भयावह बना दिया है।
दुबई, बहरीन, कतर, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के आसपास ड्रोन गतिविधि की रिपोर्ट से पूरे खाड़ी क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
खामेनेई का राजनीतिक सफर
19 अप्रैल 1939 को मशहद में जन्मे अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे सत्ता के केंद्र में आए। 1981 में बम हमले में घायल होने के बावजूद वे राष्ट्रपति बने और बाद में ‘रहबर’ की कुर्सी संभाली। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का रक्षक मानते थे, जबकि आलोचक उन्हें सख्त शासक कहते रहे।
मिडिल ईस्ट में यह टकराव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है और दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।



