-
बेंगलुरु भगदड़ में 11 की मौत, 33 घायल; सभी मृतक 35 वर्ष से कम उम्र के
-
सीएम सिद्धारमैया ने दिए RCB और DNA इवेंट एजेंसी के अफसरों की गिरफ्तारी के आदेश
-
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित, रिपोर्ट 30 दिन में
Bengaluru stampede investigation: 4 मई को हुए बेंगलुरु भगदड़ कांड ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। RCB की विक्ट्री परेड के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई और 33 घायल हो गए। इस भीषण घटना के बाद अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सख्त कदम उठाते हुए बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर समेत 8 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही RCB और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी DNA के अधिकारियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।
सीएम ने मामले की न्यायिक जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज माइकल डी’कुन्हा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है, जो 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। सरकार ने हाईकोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कहा गया है कि अब CID और SIT द्वारा भी मामले की जांच की जाएगी।
सस्पेंड किए गए अफसरों में पुलिस कमिश्नर के अलावा एडिशनल कमिश्नर, ACP, DCP सेंट्रल डिवीजन, कब्बन पार्क थाना प्रभारी, स्टेशन हाउस ऑफिसर और स्टेडियम प्रभारी शामिल हैं।
भगदड़ की मुख्य वजह भीड़ प्रबंधन में लापरवाही को बताया गया है। RCB की वेबसाइट पर फ्री पास मिलने की घोषणा के बाद वेबसाइट क्रैश हो गई और हजारों लोग बिना पास स्टेडियम पहुंच गए। गेट नंबर 10, 12 और 13 पर जबरन घुसने की कोशिश हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। नाले पर रखा स्लैब ढह गया और हल्की बारिश के बीच भगदड़ मच गई।
दोपहर करीब 3:30 बजे भीड़ अत्यधिक बढ़ गई। सभी गेट बंद कर दिए गए जिससे पासधारी भी अंदर नहीं घुस सके। महिलाओं और बच्चों को पीछे धकेला गया, कई लोग बेहोश होकर गिर पड़े। सरकार ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 5000 पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन वे भी नाकाफी साबित हुए क्योंकि उनमें से कई 36 घंटे से लगातार ड्यूटी पर थे।
इस घटना पर कोर्ट में भी सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि RCB जैसे फ्रेंचाइजी क्लब के खिलाड़ियों को सरकारी आयोजन में क्यों सम्मानित किया गया, जबकि वे देश के लिए नहीं खेलते।



