आज शनि पूजा और शमी वृक्ष पूजन से कटेंगे कर्मों के बंधन
पाताल की भद्रा का आरंभ सुबह 05:23 से, शुभ कार्यों से बचें
शनिवार व्रत, तेल अभिषेक, काले वस्त्र-तिल-दान से शनिदेव होंगे प्रसन्न
14 जून 2025, शनिवार का दिन शनि पूजा, शमी वृक्ष पूजन और दीन-दुखियों की सहायता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज आषाढ़ कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो दोपहर 03:46 PM तक रहेगी, इसके पश्चात चतुर्थी प्रारंभ होगी। उत्तराषाढा नक्षत्र आज रात्रि 12:22 AM (15 जून) तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र शुरू होगा।
विशेष बात यह है कि आज सुबह 05:23 AM से पाताल की भद्रा लगी है, जो 03:46 PM तक रहेगी। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन शनि पूजा, दान और प्रायश्चित के कार्य भद्रा में भी शुभ माने जाते हैं।
शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं। वे कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए आज यदि कोई व्यक्ति साढ़ेसाती, ढैय्या या कष्ट में है, तो शनिदेव की पूजा, व्रत और दान के माध्यम से उसे राहत मिल सकती है।
शनिवार व्रत के अंतर्गत काले कपड़े धारण करें, शनि मंदिर जाएं, तिल और सरसों के तेल से अभिषेक करें, शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करें। काले गुलाब जामुन का भोग लगाकर आरती करें। इसके बाद शमी वृक्ष, जो शनि को प्रिय है, की पूजा करें, सरसों के तेल का दीपक उसके नीचे जलाएं।
दान की विशेष महत्ता है। आज काले तिल, तेल, कंबल, छाता, चप्पल, जूते, दवा, अन्न, नीले-काले वस्त्र, लोहा व स्टील बर्तन दान करें। विशेष रूप से यह दान जरूरतमंद, बीमार, असहाय लोगों को करना चाहिए।
शनि के कोप से बचने के लिए – झूठ, चोरी, जुआ, शराब, व्यभिचार जैसे कर्मों से दूर रहें। ऐसा करने से शनि देव की कृपा बनी रहती है।
आज का दिशाशूल पूर्व दिशा में है, इसलिए पूर्व दिशा की यात्रा टालें या दूर्वा खाकर प्रस्थान करें।
चंद्रमा धनु राशि में सुबह 05:38 AM तक, फिर मकर राशि में प्रवेश करेगा, जो शनि की ही राशि है – इसलिए यह दिन शनि तंत्र और उपायों के लिए और भी विशेष माना गया है।
🔹 आज का शुभ चौघड़िया –
सुबह 07:07 से 08:52 बजे तक ‘शुभ’, 02:06 से 03:51 ‘लाभ’, 03:51 से 05:35 ‘अमृत’ काल विशेष रूप से उपयोगी है।
🔹 राहुकाल – सुबह 08:52 से 10:37 तक है। इस समय को शुभ कार्यों से बचें।



