➤ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आ सकते हैं
➤ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण व धर्मशाला में बैठक का कार्यक्रम प्रस्तावित
➤ मुख्यमंत्री ने बादल फटने की घटनाओं, बागवानों के नुकसान और रिलीफ फंड की मांग पर दिए संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिमाचल प्रदेश दौरा 9 सितंबर को तय माना जा रहा है। पीएम कार्यालय से राज्य सरकार को भेजे प्रस्तावित शेड्यूल के अनुसार प्रधानमंत्री कांगड़ा संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे। मौसम अनुकूल रहा तो वे आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे और धर्मशाला में उच्च स्तरीय बैठक भी लेंगे। बैठक के दौरान प्रदेश में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा से हुए भारी नुकसान का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू केंद्र से रिलीफ फंड को समय पर भेजने की मांग रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने इस वर्ष मानसून सीजन में 50 से अधिक बादल फटने की घटनाएं झेली हैं। ये घटनाएं नदी-नालों में नहीं बल्कि पहाड़ी जंगलों में हुईं, जिससे नए तरह की चुनौती सामने आई है। वैज्ञानिक टीमें इन घटनाओं के कारणों की जांच में जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने चेताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में और ज्यादा नुकसान हो सकता है।
उन्होंने बताया कि मणिमहेश यात्रा के दौरान फंसे करीब 16,000 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टर और एचआरटीसी बसों का सहारा लिया गया। श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक निशुल्क सुविधा उपलब्ध करवाई गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बागवानों को बरसात के कारण भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सेब मंडियों तक पहुंचे। मौसम साफ होते ही बाधित मार्ग बहाल करने के लिए मशीनरी और जनशक्ति तैनात की जा रही है। उन्होंने कहा कि किन्नौर, शिमला और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सरकार के प्रतिनिधि मौके पर जाकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
उधर, हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले हैं। उनके इस प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “देर आए, दुरुस्त आए,” यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री अब हिमाचल आ रहे हैं। विक्रमादित्य सिंह ने याद दिलाया कि पिछले दो सालों से राज्य आपदाओं से जूझ रहा है लेकिन प्रधानमंत्री पहले नहीं आए। उन्होंने कहा कि मोदी हिमाचल को अपना दूसरा घर मानते हैं, ऐसे में यह उनका कर्तव्य भी बनता है कि वे यहां आकर हालात का जायजा लें।
लोक निर्माण मंत्री ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की कि इस बार की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए, ताकि प्रदेश को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अधिक सहायता मिल सके।
इसी बीच विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण अक्टूबर में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभी राज्य आपदा से जूझ रहा है और ऐसे माहौल में प्रतिमा का अनावरण करना उचित नहीं होगा। स्थिति सामान्य होने पर कांग्रेस आलाकमान से चर्चा कर यह आयोजन किया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह ने धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ और वहां जमा हो रहे टनभर कचरे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिमाचल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है। इस पर सरकार जल्द कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर ठोस कदम उठाएगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रदेश में 1250 सड़कें बंद हैं और विभाग युद्ध स्तर पर इन्हें खोलने में जुटा है। अवैध डंपिंग और ड्रेनेज व्यवस्था की खामियों पर विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। विक्रमादित्य ने साफ कहा कि अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई होगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पहाड़ों और पेड़ों का कटान कम करने तथा फोरलेन प्रोजेक्ट्स में अधिक टनलिंग करने का निर्णय लिया गया है, ताकि पर्यावरण और धार्मिक स्थलों को नुकसान न पहुंचे।



