➤ हाईकोर्ट ने कहा 2022 के बाद नियमित हुए अनुबंध कर्मचारी भी संशोधित वेतनमान के हकदार
➤ सरकारी आदेश को अदालत ने किया खारिज, तीन हफ्ते में लाभ देने के निर्देश
➤ लापरवाही पर अधिकारी पर 10 हजार रुपये जुर्माना, राशि आपदा राहत कोष में जमा होगी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि 2022 के बाद नियमित हुए अनुबंध कर्मचारी भी संशोधित वेतनमान पाने के हकदार हैं। अदालत ने सरकार के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता का दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि उन्होंने 30 सितम्बर 2021 तक दो साल की अनुबंध सेवा पूरी नहीं की थी।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में हुई। कोर्ट ने सरकार की दलील खारिज करते हुए कहा कि संशोधित वेतनमान नियम, 2022 केवल उन कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे जो 30 सितम्बर 2021 तक नियमित हुए थे, बल्कि इसका लाभ उन कर्मचारियों को भी मिलेगा जो इसके बाद नियमित हुए हैं। अदालत ने साफ कहा कि एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए अलग-अलग वेतनमान नहीं हो सकते।
अदालत ने मामले पर लापरवाही और देरी बरतने पर जनजातीय विभाग के संयुक्त सचिव पर नाराज़गी जताई और उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि मुख्य न्यायाधीश आपदा राहत कोष 2025 में जमा करने के आदेश दिए गए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी तीन हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता प्रभजोत सिंह के मामले पर दोबारा विचार करें और उसे संशोधित वेतनमान का लाभ दें। न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले दिए गए मोहित शर्मा मामले के फैसले की गलत व्याख्या की है। कोर्ट ने कहा कि एक बार अनुबंध कर्मचारी नियमित हो जाते हैं, तो उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
यह फैसला प्रदेश के हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से संशोधित वेतनमान का लाभ पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।



