Follow Us:

नयनादेवी में बादल फटा, गाड़ियां और घर मलबे में दबे

नयनादेवी में बादल फटा, गाड़ियां और घर मलबे में दबे
धर्मपुर में बड़ा लैंडस्लाइड, आठ घर खाली करवाए गए
हिमाचल में सामान्य से 43% अधिक बारिश दर्ज


हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला की नयनादेवी विधानसभा में बीती रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। नम्होल क्षेत्र में अचानक आए मलबे की चपेट में 10 से ज्यादा गाड़ियां दब गईं, जबकि कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। देर रात हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोग दहशत में हैं और प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।

नम्होल में बादल फटने के बाद मलबे में दबी गाड़ियां

इसी तरह मंडी जिला के धर्मपुर उपमंडल के सपड़ी रोह गांव में सुबह करीब चार बजे एक बड़ा भूस्खलन हुआ। भूस्खलन से गांव में भारी मात्रा में मलबा घुस आया और कई घर खतरे की जद में आ गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र 8 घरों को खाली करवाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है।

वहीं, बिलासपुर, कांगड़ा और मंडी समेत कई जिलों में पूरी रात तेज बारिश होती रही। मौसम विभाग ने आज और कल 10 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। केवल किन्नौर और लाहौल-स्पीति को इस अलर्ट से बाहर रखा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है।

बिलासपुर के नम्होल में रात में बादल फटने के बाद सड़क पर आया मलबा हटाते हुए लोग।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, परसों यानी 15 सितंबर से मानसून कमजोर पड़ जाएगा और उसके बाद 17 सितंबर तक बारिश का कोई अलर्ट नहीं रहेगा। हालांकि, इस बार मानसून का रुख बेहद आक्रामक रहा है। 1 जून से 12 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से 43 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई है। जहां सामान्यत: इस अवधि में 678.4 मिलीमीटर बारिश होती है, वहीं इस बार 967.2 मिलीमीटर बरसात हो चुकी है।

सिर्फ 1 से 12 सितंबर के बीच ही प्रदेश ने सामान्य से 133 प्रतिशत अधिक बारिश झेली। इस दौरान सामान्य बारिश 64.6 मिलीमीटर होती है, जबकि इस बार 150.4 मिलीमीटर दर्ज की गई। कुल्लू जिला में तो सामान्य से 363 प्रतिशत अधिक, सोलन में 256 प्रतिशत, ऊना में 241 प्रतिशत और शिमला में 231 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

बारिश और बादल फटने की घटनाओं से जहां लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है, वहीं किसानों की जमीन और फसलें भी भारी नुकसान झेल रही हैं। ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह लैंडस्लाइड से सड़कें बंद हो गई हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।