➤ पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ठेकेदारों को मलबा गलत जगह डंप करने पर लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी
➤ बारिश और लैंडस्लाइड से शिमला की सैकड़ों सड़कें बंद, सेब बहुल इलाकों में युद्धस्तर पर काम
➤ केंद्र सरकार की मदद नाकाफी, हिमाचल को और बड़ी आर्थिक सहायता की जरूरत
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और लगातार लैंडस्लाइड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिमला की कई सड़कें बंद हो गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। शिमला की सर्कुलर रोड के हिमलैंड के पास बड़ा लैंडस्लाइड आया, जिसकी चपेट में आधा दर्जन गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हालात का जायजा लेने के लिए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह खुद मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ स्थिति का मूल्यांकन किया।
विक्रमादित्य सिंह ने साफ चेतावनी दी कि सड़क निर्माण का मलबा चयनित जगह पर ही डंप किया जाए। अगर किसी ठेकेदार ने नियमों का उल्लंघन किया तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा और दोषी अधिकारियों को चार्जशीट किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि बारिश के पानी के साथ यही मलबा नीचे आकर तबाही मचा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार युद्धस्तर पर सड़कें खोलने में जुटी हुई है, खासकर सेब बहुल इलाकों में ताकि बागवानों को मंडियों तक पहुंचने में दिक्कत न हो। इसके लिए 20 किलोमीटर की दूरी पर एसडीओ और जेई तैनात किए गए हैं। मंत्री ने धर्मपुर बस अड्डा बह जाने के बाद कहा कि भविष्य में नदियों और नालों से 100 मीटर दूरी पर कोई भी भवन या दफ्तर का निर्माण नहीं होगा, ताकि आपदा का खतरा कम हो।
केंद्र सरकार से मिली मदद पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1500 करोड़ रुपये की घोषणा की है, जिसके लिए धन्यवाद है। लेकिन प्रदेश में आई भीषण आपदा को देखते हुए यह मदद नाकाफी है और राज्य को और बड़ी सहायता की दरकार है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी भी हजार से ज्यादा सड़कें बंद हैं। मशीनरी लगाई गई है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन सड़कों की है जिनके बड़े हिस्से बह गए हैं। ऐसी जगहों पर भविष्य में मजबूत रिटेनिंग वॉल बनानी होंगी ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।



