➤ न्यायमूर्ति जीया लाल भारद्वाज और न्यायमूर्ति रमेश वर्मा ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली
➤ मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. एस. संधावालिया ने दिलाई शपथ
➤ सरल लेकिन प्रभावशाली समारोह में वरिष्ठ न्यायाधीशों और विशिष्ट अतिथियों की रही उपस्थिति
शिमला, 6 अक्तूबर। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को एक गरिमामय अवसर देखने को मिला, जब श्री जीया लाल भारद्वाज और श्री रमेश वर्मा ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में शपथ ग्रहण की। यह शपथ समारोह मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. एस. संधावालिया की अध्यक्षता में उच्च न्यायालय परिसर, शिमला में आयोजित किया गया। समारोह भले ही सरल रहा, लेकिन वातावरण में न्यायिक गरिमा और गौरव का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
समारोह में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ, न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला सहित न्यायालय के सभी न्यायाधीश उपस्थित रहे।
रजिस्ट्रार जनरल भूपेश शर्मा ने कार्यवाही का संचालन किया और भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति वारंट पढ़े, जिनके माध्यम से श्री जीया लाल भारद्वाज और श्री रमेश वर्मा को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
न्यायमूर्ति जीया लाल भारद्वाज का जन्म 20 अगस्त 1969 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1994 में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गोयल (पूर्व न्यायाधीश, हिमाचल हाईकोर्ट) के चैंबर में अपने विधिक करियर की शुरुआत की। वहीं न्यायमूर्ति रमेश वर्मा का जन्म 7 मई 1974 को हुआ और उन्होंने 1999 में अपने पिता वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम दास वर्मा के मार्गदर्शन में वकालत शुरू की। दोनों लंबे समय से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विभिन्न विधिक क्षेत्रों में अभ्यास कर रहे हैं और कानून की सभी शाखाओं में गहन अनुभव रखते हैं।
इस अवसर पर पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश — न्यायमूर्ति ए. के. गोयल, न्यायमूर्ति के. सी. सूद, न्यायमूर्ति सुरिंदर सिंह, न्यायमूर्ति वी. के. शर्मा, न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, न्यायमूर्ति चंदर भूषण बारोवालिया — लोकायुक्त हिमाचल प्रदेश, न्यायमूर्ति जीया लाल भारद्वाज और न्यायमूर्ति रमेश वर्मा के परिजन और परिवारजन, महाधिवक्ता अनुप रतन, बार काउंसिल चेयरमैन लवनीश कंवर, बार एसोसिएशन अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह चंदेल, भारत के उप सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा, और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ रजिस्ट्रारों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति रही।
यह समारोह न केवल न्यायपालिका की परंपराओं का प्रतीक था, बल्कि हिमाचल की न्यायिक विरासत में नए अध्याय की शुरुआत भी बना।



